मायावती के सियासी दाँव-पेचों ने बढ़ाई गहलोत की परेशानी, राजस्थान सीएम ने बीजेपी पर लगाया आरोप

राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार कांग्रेस के भीतर की अदावत के बाद अब बाहर से आए विधायकों से भी मुसीबत में पड़ गई हैं। इससे पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin pilot) की सरकार गिराने की कथित साजिश और अब बसपा विधायकों के विलय पर बसपा सुप्रीमो मायावती (mayawati) के कानूनी दाँव-पेंचो ने सीएम गहलोत की टेंशन बढा दी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने सियासी संकट (Rajasthan crisis) के बीच माया की एंट्री पर कहा कि, “मायावती जो बयानबाजी कर रही हैं वो बीजेपी के इशारे पर कर रही हैं। बीजेपी जिस प्रकार से सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग का दुरुपयोग कर रही है, डरा रही है, धमका रही है। आप देखो राजस्थान में ही क्यों हो रहा है।” गहलोत ने कहा, “मायावती भी डर रही हैं उससे, मजबूरी में वो बयान दे रही हैं।”

यही कारण है कि एक दिन पहले मायावती पर भड़ास निकालते हुए सीएम गहलोत ने यहां तक कह दिया कि बसपा प्रमुख मायावती बीजेपी के इशारों पर बयानबाजी कर रही हैं। बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय से अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार को पिछले साल मजबूती मिली थी। तब उनके पास 101 विधायक थे, 6 और मिलने से 107 हो गए। लेकिन 200 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ दल के पास फिलहाल संख्या बल कम है। सचिन पायलट गुट की बगावत के बाद विधानसभा में बहुमत का गणित बदल गया है। ऐसे में अगर बसपा के विधायकों का साथ छूटता है तो गहलोत सरकार संकट में आ सकती है।

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यदि बसपा और बीजेपी विधायकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से फैसला विलय के खिलाफ आता है तो सरकार खतरे में आ सकती है। वहीं 200 विधायकों वाली विधानसभा में से 6 विधायकों को हटाए जाने पर कुल 194 विधायक जरूरी होंगे। जबकि गहलोत सरकार के 102 विधायकों का दावा सही माने तो वो घटकर 96 ही रह जायेगा। जोकि गहलोत सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

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