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कृषि कानूनों के विरोध में ग्रंथी ने गोली मार की आत्महत्या, सुसाइड नोट बरामद

ग्रंथी ने की आत्महत्या

ग्रंथी ने की आत्महत्या

Kisan Aandolan: तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. कोई बीमार होकर जान गंवा रहा है तो कोई खुद की जान ले रहा है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 12, 2021, 3:00 PM IST

चंडीगढ़. पंजाब के जिला फ़िरोजपुर के गांव मेहमा में सोमवार देर रात बाबा राम सिंह की तरह बाबा नसीब सिंह मान ने केंद्र सरकार की तरफ से खेती कानून वापस ना लेने के चलते अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या (Suicide) कर ली. मरने से पहले उन्होंने ने एक सुसाइड नोट (Suicide) भी लिखा. सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है कि उस पर किसी तरह का कोई कर्जा नहीं है, लेकिन मोदी सरकार के काले कानूनों के कारण किसानों की दयनीय हालत देखकर परेशान हूं. मेरी मौत के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है. वहीं ग्रंथी की मौत की खबर से गांव में शोक की लहर है.

वहीं मामले की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने मृतक ग्रंथी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. बता दें कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. कोई बीमार होकर जान गंवा रहा है तो कोई खुद की जान ले रहा है.

सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजर
सरकार और किसानों के बीच वार्ता लगातार विफल हो रही है. दोनों पक्षो के बीच अगली बातचीत के लिए 15 जनवरी की तारीख तय है. ऐसे में इस आंदोलन से प्रभावित लोगों को अब सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है. किसान आंदोलन के मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर भी नजर टिकी हुई है. वहीं बहादुरगढ़ में टीकरी बॉर्डर बंद होने और 15 किलोमीटर तक आंदोलन फैलने के कारण कई हजार उद्योग प्रभावित हैं. आम आदमी को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.सरकार के खिलाफ बढ़ रही नाराजगी

किसान नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को नहीं मान रही है, दिन प्रतिदिन किसान ठंड में दम तोड़ रहे हैं. अभी तक करीब 50 किसान इस आंदोलन में शहीद हो गए हैं, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. किसानों की लगातार हो रही मौत के बाद किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.







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