HCMS ultimatum if three doctors are not reinstated, then stop work from Monday | एचसीएमएस का अल्टीमेटम तीनों डॉक्टर्स की बहाली नहीं हुई तो सोमवार से काम छोड़ो हड़ताल

हिसार21 घंटे पहले

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हिसार. निलंबित तीन डॉक्टर्स की बहाली की मांग पर सिविल अस्पताल में एचसीएमएस के बैनर तले डॉक्टर्स ने इकट्‌ठे होकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।

  • डाॅक्टरों ने सिविल अस्पताल में सांकेतिक प्रदर्शन कर ज्ञापन साैंपा

स्वास्थ्य मुख्यालय द्वारा सिविल अस्पताल के तीन डॉक्टर्स के निलंबन पर हरियाणा मेडिकल सिविल सर्विसिस एसोसिएशन ने रोष जताया है। मंगलवार को अस्पताल के सभी डॉक्टर्स सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। शांतिपूर्वक सांकेतिक प्रदर्शन करते हुए निलंबित डॉक्टर्स को बहाल करने की मांग की।

एसोसिएशन ने चेताया कि अगर स्वास्थ्य विभाग, शासन व प्रशासन ने रविवार तक निलंबन के आदेश वापस नहीं लिए तो सोमवार से काम छोड़ो हड़ताल पर चले जाएंगे। इस फैसले का राज्य एसो. ने समर्थन किया है। एसोसिएशन ने ज्ञापन की कॉपी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्री, डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा को भेजी है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मुख्यालय ने सिविल अस्पताल के तीन डॉक्टर्स को एमओ डॉ. प्रेम कुमार (हाल दिवंगत) का मेडिकल करने के दौरान गलत ओपिनियन के आरोप में सस्पेंड किया है। इनमें सर्जन डॉ. राजीव, मनोचिकित्सक डॉ. पूनम और एमओ डॉ. नीरज शामिल हैं।

कोर्ट ने डॉक्टर का मेडिकल करने के आदेश दिए थे

सिविल अस्पताल में कार्यरत रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रेम कुमार स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम विनोद उर्फ मनोज इत्यादि मामले में सेशन कोर्ट में गए थे। उस दौरान डॉक्टर के मुंह से शराब की दुर्गंध आई थी। सही ढंग से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। तब कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर का मेडिकल करने के लिए कहा था। इसके लिए तीन सदस्यीय बोर्ड का गठन हुआ था, जिसमें सर्जन डॉ. राजीव, मनोचिकित्सक डॉ. पूनम और मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीरज शामिल थे।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर आपत्ति थी, मुख्यालय को संज्ञान लेने के दिए थे आदेश

मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में लिखा था कि डॉ. प्रेम कुमार सजग, सहयोगी और समय के पाबंद थे। सभी कमांड्स को भी मान रहे थे। जब आए तो उनके मुंह से दुर्गंध आ रही थी। मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रेम कुमार को ब्लड सैंपल देने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। ऐसे में नहीं बता सकते कि क्या सेवन किया है और क्या नहीं। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए स्वास्थ्य मुख्यालय को खुद मामले पर संज्ञान लेने के लिए कहा था। लिखा था कि बोर्ड डॉक्टर को बचा रहे हैं, जबकि डॉक्टर जब कोर्ट में आया था तब वह ढंग से खड़ा तक नहीं हो पा रहा था। मुंह से शराब की बदबू आ रही थी।

हेल्थ मुख्यालय का बिना जांच निलंबन का फैसला गलत : जिला प्रधान

नियमानुसार मेडिकल ओपिनियन दिया है। इस मामले में स्वास्थ्य मुख्यालय से डायरेक्टर डेंटल डॉ. प्रवीण सेठी जांच के लिए हिसार आए थे। उन्होंने सिर्फ मेडिकल डॉक्यूमेंट लिए और वापस चले गए थे। तीनों डॉक्टर्स से पूछताछ करके तथ्य जुटाते लेकिन ऐसा नहीं हुआ था। इस मामले में मेडिकल बोर्ड के सदस्यों का पक्ष नहीं जाना है। जब तक डॉक्टर्स बहाल नहीं होते, तब तक लड़ेंगे। -डॉ. कामिद मोंगा, जिला प्रधान, एचसीएमएस।

मामले में स्वास्थ्य विभाग और मंत्री से बात करेंगे : राज्य प्रधान

तीन डॉक्टर्स का निलंबन सरासर गलत है। बिना जांच कार्यवाही हुई है, जिसका विरोध करते हैं। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री से बात करेंगे। अगर निलंबन वापस नहीं हुआ तो जिला एसोसिएशन के फैसले काे पूरा समर्थन रहेगा। इस महामारी के दौर में डॉक्टर्स का निलंबन निंदनीय है। जरूरत पड़ी तो प्रदेश के सभी डॉक्टर्स बहाली की मांग पूरी होने तक हड़ताल पर रहेंगे।-डॉ. जसबीर परमार, राज्य प्रधान, एचसीएमएस।

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