Corona से एक महीने जंग लड़कर हार गया 25 साल का डॉक्टर, AIIMS में हुई मौत | hisar – News in Hindi

Corona से एक महीने जंग लड़कर हार गया 25 साल का डॉक्टर, AIIMS में हुई मौत

हरियाणा के 25 वर्षीय डॉक्टर की कोरोना से मौत हो गई.

हरियाणा के झज्जर स्थित AIIMS में तैनात डॉ. विकास सोलंकी को पिछले महीने COVID-19 पॉजिटिव होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. नाजुक हालत में उन्हें दिल्ली एम्स लाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 15, 2020, 4:15 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (COVID-19) से पिछले एक महीने से संघर्ष कर रहे 25 साल के युवा डॉक्टर ने दम तोड़ दिया. दिल्ली स्थित एम्स (Delhi AIIMS) में हरियाणा के हिसार के रहने वाले डॉ. विकास सोलंकी की कोरोना की वजह से आज सुबह मौत हो गई. गौरतलब यह है कि विकास सोलंकी हरियाणा के झज्जर एम्स (Jhajjar AIIMS) में कार्यरत थे, जहां वे कोरोना संक्रमित पाए गए. पिछले महीने कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनका झज्जर में ही इलाज चल रहा था. बीते शनिवार को डॉ. सोलंकी को दिल्ली एम्स स्थित ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहां आज सुबह उनकी मौत हो गई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. विकास सोलंकी की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें दिल्ली एम्स में वेंटिलेटर पर रखा गया था. MBBS की पढ़ाई के दौरान विकास के सीनियर रहे डॉ. अजय मोहन के अनुसार शुरुआत में विकास सोलंकी में कोरोना के लक्षण कम पाए गए थे. एसिम्पटमैटिक होने की अवस्था में इलाज के दौरान उनके शरीर के अन्य अंगों में वायरस का संक्रमण हुआ, जिसके बाद हालत बिगड़ती चली गई. झज्जर में जब इलाज से राहत न मिली तो उन्हें दिल्ली एम्स लाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी इस युवा डॉक्टर को बचाया न जा सका. सोमवार की सुबह डॉ. विकास सोलंकी की मौत हो गई.

अपने दोस्तों के बीच खुशमिजाज और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने वाले डॉ. विकास सोलंकी को उनके दोस्त अपने बैच के टॉपर और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाले शख्स के रूप में याद करते हैं. एम्स में विकास सोलंकी के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले डॉ. अभिनव सिंह वर्मा ने बताया कि 2015 में विकास और उनके कुछ दोस्त लेह गए थे. वहां विकास की पहल पर सभी ने एक स्कूल में पढ़ने वाले छठी से नौवीं कक्षा तक के छात्रों की आर्थिक मदद करने का बीड़ा उठाया था. डॉ. वर्मा ने कहा कि विकास की पहल पर की गई इस मदद से अगले दो साल तक लेह के उस स्कूल में किसी भी छात्र को पढ़ाई के लिए एक पैसा खर्च नहीं करना पड़ा.



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