If the boy cries emotionally, then why is it said that tears are flowing like girls, sentimentality is same in both: Rhythm | लड़का भावुक होकर रोता है तो उस समय क्यों बोला जाता है कि लड़कियों की तरह आंसू बहा रहे हो, भावुकता तो दोनों में एक समान होती है : रिदम

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पानीपतएक घंटा पहले

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रिदम ने वेबिनार में विचार रखे।

  • पानीपत की बेटी ने 35 देशों के 625 प्रतिनिधियों को बेटा-बेटी को समान महत्व देने का किया आह्वान

पानीपत की बेटी रिदम ने इंटरनेशनल वुमेन वर्चुअल यूथ समिट पर आधारित वेबिनार में 35 देशों के 625 प्रतिनिधियों को बेटा-बेटी को समान महत्व देने और फायदे गिनवाकर रूढ़िवादी विचारधारा में बदलाव का आह्वान किया। रिदम ने कहा कि अब बहुत हुआ। क्यों माता-पिता, दोस्त या परिचित रोते हुए लड़के की तुलना लड़कियों से करते हैं। एक लड़का किसी भी बात को लेकर भावुक होकर रोता है तो उस समय क्यों बोला जाता है कि लड़कियों की तरह क्यों रो रहे हो।

भावुकता तो लड़के व लड़कियों की एक समान होती है। रो तो लड़के भी सकते हैं, अगर लड़के रोएं तो उन्हें समझाएं, लेकिन यह न बोलें कि लड़कियों के समान कमजोर हो। लड़कियां किसी भी रूप मेें कमजोर नहीं है। समाज में समानता तभी आएगी, जब ऐसे उदाहरण देने बंद किए जाएंगे। रिदम ने कहा वेबिनार में शामिल प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे जिस किसी भी संस्था या समिति से जुड़े हैं, उनके माध्यमों से माता-पिता को संदेश पहुंचाएं कि संस्कार बनने व परिवार की इज्जत रखने की दुहाई केवल बेटियों को ही न दी जाए। आजकल बेटे माता-पिता का नाम डुबा रहे हैं। इसलिए बेटों को भी समझाया जाए।

प्रतिभागियों ने रखे थे विचार
वेबिनार में शामिल भारत समेत 35 देशों के 625 प्रतिनिधियों ने 6 विषयों पर अपने विचार रखे। रिदम ने बताया कि वेबिनार में मुख्य रूप से एजुकेशन, ग्लोबल सिटिजनशिप, इंप्रोवेरिंग, कोविड जेनरेशन, यूथ लीडरशिप, यूथ इनवोलवेमेंट इन पॉलिटिक्स रखे गए थे। उन्होंने यूथ लीडरशिप विषय चुना था। इसमें कर्नाटक के डीजीपी भास्कर राव मुख्यातिथि रहे। वहीं वल्ड यूथ ऑर्गेनाइजेशन के प्रेजिडेंट एवं नेशनल अवार्डिज फेडरेशन आफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. जाविद जामदर विशेष अतिथि रहे।

उद्यमी शिव मल्होत्रा ने बेटी रिदम को नहीं थोपे फैसले
रिदम अपनी खुद की ऑनलाइन काउंसिलिंग वेबसाइट www.theskilletteschool.com चलती है। इसे दी स्किलेट स्कूल नाम दिया गया है। रिदम के पिता शिव मल्होत्रा टेक्सटाइल कारोबारी है। बड़ा भाई ध्रुव बिजनेसमैन व मां किरण गृहिणी है। मल्होत्रा का कहना है कि उन्होंने कभी बेटी रिदम पर अपने फैसलेे नहीं थोपे। बस 12वीं तक पढ़ने के बाद एक बार पूछा था कि डॉक्टरी लाइन में जाना है या इंजीनियरिंग करनी है। बेटी बोली इनमें से कुछ नहीं। यह सुन मैंने बोल दिया जो मन करे वो कर।

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