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Relief for injection-fearing people, nasal spray flu vaccine for infants and elderly | इंजेक्शन से डरने वाले लोगों के लिए राहत, ऐसे मरीजों को लगेगी Nasal Covid-19 वैक्सीन

नई दिल्लीः कोरोना वायरस महामारी से लंबी जंग के बाद दुनिया भर के लोगों को इस वक्त बेसब्री से वैक्सीन (Corona Vaccine) का इंतजार है. अमेरिका (America), रूस (Russia) और ब्रिटेन (Britain) में कोरोना की वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है. वहीं भारत मे भी 3 वैक्सीन निर्माता कंपनियों ने इमरजेंसी अप्रूवल के लिए आवेदन कर रखा है. उम्मीद है कि साल 2021 की शुरुआत में भारत में भी टीकाकरण (Vaccination) का प्रथम चरण शुरू हो जाएगा.

दुनिया भर में बन रही 300 से अधिक वैक्सीन
अभी अलग-अलग देशों में 300 से ज्यादा वैक्‍सीन का डेवलपमेंट हो रहा है. इनमें से अधिकतर वैक्‍सीन इंजेक्‍शन की शक्‍ल में दी जाने वाली हैं. हालांकि कुछ वैक्‍सीन ऐसी भी डेवलप की जा रही हैं, जिन्‍हें नाक (INTRA-NASAL) और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कराया जा सकता है. कोरोना ज्यादातर शरीर में नाक के जरिए एंट्री करता है. इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि जिन टिश्‍यूज से पैथोजेन का सामना होगा, उन्‍हीं टिश्‍यूज में इम्‍युन रेस्‍पांस ट्रिगर करना असरदार हो सकता है, जो नेजल स्‍प्रे कर सकता है. भारत में हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ने भी नेजल वैक्सीन का निर्माण किया है जिसके पहले चरण का ट्रायल अगले महीने जनवरी में शुरू हो जाएगा. 

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नाक और मुंह वाली वैक्सीन पर जारी है काम
Intra-muscular और Nasal वैक्सीन के साथ-साथ विश्व में कुछ जगहों पर ओरल वैक्सीन (Oral Vaccine) पर भी कम चल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी वैक्सीन में रिएक्शन के चांस कम होते हैं. साथ ही लॉजिस्टिक कॉस्ट भी कम होती है. जिससे वैक्सीन की कॉस्ट में कमी आती है. ओरल वैक्सीन से कम समय में वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती है. अभी फिलहाल ओरल वैक्सीन के पहले चरण का ट्रायल शुरू हो चुका है. जिसमें अमेरिका की IMMUNITY BIO और ऑस्ट्रेलिया की BURNBABY BIOTECH मुख्य रूप से शुरुआती चरण का ट्रायल कर रही है.

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बच्चे और बुजुर्गों को मिलेगी नेजल वैक्सीन
दिल्ली स्थित एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. पुनीत मिश्रा का कहना है कि देश की एक बड़ी आबादी जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं उन्हें इंजेक्‍शन लगवाने से डर लगता है. ऐसे में इस तरह की नेजल वैक्‍सीन को बड़े पैमाने पर प्रोड्यूस करना और टीकाकरण करना आसान होता है. आमतौर पर INTRA-MUSCULAR (इंजेक्‍शन वाली) वैक्‍सीन कमजोर म्‍यूकोसल रेस्‍पांस ट्रिगर करती हैं, क्‍योंकि उन्‍हें बाकी अंगों की इम्‍युन सेल्‍स को इन्‍फेक्‍शन की जगह पर लाना होता है. आम वैक्‍सीन के मुकाबले नेजल वैक्सीन बड़े पैमाने पर बनाना और डिस्‍ट्रीब्‍यूट करना आसान है. साथ ही अभी NASAL और ओरल वैक्सीन का ट्रायल शुरुआती दौर में हैं. अभी इनमें बहुत काम करने की जरूरत है.

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अगर भारत समेत कई देशों में नेजल और ओरल वैक्सीन के ट्रायल कामयाब होते हैं और इस तरह की वैक्सीन सच में कोरोना संक्रमण के बचाव में लोगों के लिए असरदार साबित होती है तो वो दिन दूर नहीं जब लोग CORONA की वैक्सीन का इस्तमाल Nasal स्प्रे और ORS के घोल की तरह कर सकेंगे.



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