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The Crown Seaon 4: lord mountbatten was the first viceroy of india, here know about himThe Crown 4: कौन थे लुईस लॉर्ड माउंटबेटन और क्या था उनका भारत से कनेक्शन?

नई दिल्लीः वेब सीरीज ‘द क्राउन’ सीजन 4 का पहला एपिसोड काफी धमाकेदार था. इस एपिसोड में दर्शकों को 1979 की उन दुखद घटनाओं की झलक देखने को मिली जिसने ब्रिटेन के शाही परिवार को हिलाकर रख दिया था.

प्रिंस चार्ल्स के साथ थी स्पेशल बॉन्डिंग
द क्राउन के सीजन 4 (The Crown 4) में लुईस लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten) की मौत के बारे में दिखाया जाता है. एपिसोड की शुरुआत में माउंटबेटन की तत्कालीन युवा प्रिंस चार्ल्स के साथ स्पेशल बॉन्डिंग देखने मिलती है, जो उनकी लाइफ में एक पिता की तरह आदर्श भूमिका निभाते नजर आते हैं. इस तरह वे भी ब्रिटेन के शाही परिवार के एक प्रमुख सदस्य होते हैं. बाद में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी उनकी हत्या कर देती है. माउंटबेटन की हत्या एक विवादास्पद क्षेत्र की वजह से ब्रिटेन और आयरलैंड को लेकर चल रहे तनाव के बीच होती है.
 
भारत के आखिरी वायसराय थे लार्ड माउंटबेटन
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) और प्रिंस फिलिप से खास संबंध रखने वाले लॉर्ड लुईस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten) महारानी विक्टोरिया के पोते थे. वह क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के राजकुमार फिलिप के चाचा और दूसरे चचेरे भाई थे. शाही परिवार का हिस्सा बन माउंटबेटन ने ब्रिटिश रॉयल नेवी (British Royal Navy) के एक अधिकारी के रूप में काम करते थे. वे भारत के आखिरी वायसराय थे. ब्रिटिश सरकार ने भारत का आखिरी वायसराय नियुक्त किया था. 

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1947 में भारत के वायसराय नियुक्त हुए थे माउंटबेटन

किंग जॉर्ज ने फरवरी 1947 में ब्रिटिश भारत लॉर्ड माउंटबेटन को भारत के वायसराय (Viceroy) के रूप में नियुक्त किया था. भारत में अपने कार्यकाल के बाद वह ब्रिटश रॉयल नौसेना के भूमध्य बेड़े का हिस्सा थे. इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश रॉयल नेवी में बतौर कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दी. तब उनके ब्रिटेन के शाही परिवार के साथ और भी घनिष्ट संबंध बन गए थे.

कैसे हुई थी माउंटबेटन की हत्या
जब माउंटबेटन अपने परिवार के साथ कहीं घूमने निकले थे, तब 27 अगस्त 1979 को आयरिश सेना द्वारा उनकी नाव को एक बम धमाके से उड़ा दिया गया था, जिसमें लुइस माउंटबेटन और उनके दो पोते निकोलस व पॉल मारे गए थे. बता दें कि माउंटबेटन की हत्या से उस वक्त पूरी दुनिया आहात थी. भारत में भी उनकी मौत पर 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया था.



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