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Heart transplant of 45 year old man in Max Hospital Saket From Jaipur

नई दिल्ली: कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका दिल उनकी जिंदगी के बाद भी धड़कता रहता है. ऐसे लोगों का फलसफा होता है कि अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ऐ दिल जमाने के लिए. ऐसा ही कुछ किया है राजस्थान (Rajsthan) के एक लड़के ने जिसकी बदौलत दिल्ली (Delhi) के अस्पताल में भर्ती एक शख्स को नई जिंदगी मिली है.

बच्चे ने किया अंगदान
हम बात कर रहें हैं राजस्थान के उस 16 साल के बच्चे की जो सड़क दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल हो गया था. जयपुर के अस्पताल में जैसे ही इलाज के दौरान बच्चे के माता-पिता को अपने बेटे के ब्रेन डेड (Brain dead) होने की सूचना मिली उनके पैरों तले जमीन सी खिसक गई, लेकिन खुद को संभालते हुये माता-पिता ने अपने बच्चे के दिल को दान करने का साहसी फैसला लिया ताकि किसी और को जीवनदान मिल सके.

चार घंटे में पूरा हुआ ऑपरेशन
सूचना मिलते ही दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल (Max Hospital) की टीम बिना देर किए चार्टर्ड प्लेन से जयपुर पहुंची और चार घण्टे में दूसरे व्यक्ति के शरीर में हार्ट ट्रांसप्लांटेशन (Heart Transplant) की प्रक्रिया पूरी कर ली. इस पूरे घटनाक्रम को जल्द से जल्द अंजाम देने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट से मैक्स अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया जिससे सिर्फ 18 मिनट में ही ट्रांसप्लांट किये जाने वाले हार्ट को दिल्ली एयरपोर्ट से मैक्स अस्पताल तक पहुंचा दिया गया.

सड़क हादसे में हुआ था घायल
दरअसल 16 साल का एक बच्चा सड़क हादसे में गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. जयपुर के अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. जयपुर से उसके ब्रेन डेड होने व अंगदान की सूचना मिली. जिसके बाद मैक्स अस्पताल की टीम चार्टर विमान से जयपुर पहुंची. यह टीम वहां से दिल लेकर चार्टर विमान से वापस बुधवार रात नौ बजे दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट पर पहुंची. एयरपोर्ट से दिल्ली पुलिस ने मैक्स अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस 18 मिनट में एयरपोर्ट से दिल लेकर अस्पताल पहुंच गई. अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चार घंटे में दिल प्रत्यारोपण होना जरूरी है. इस निर्धारित समय के अंदर दिल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई.

45 साल के मरीज का हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट
दिल्ली के मैक्स अस्पताल में मेरठ के जिस 45 साल के मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया उनका दिल महज 15-20 फीसदी ही काम कर पा रहा था. इस वजह से वो ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे थे. साथ ही उनके पैरों में भी गम्भीर सूजन हो गई थी. बीते चार माह से ये मरीज और उनकी देखभाल करने वाले डाक्टरों की टीम हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के लिए इंतजार कर रहे थे. अब जाकर 16 साल के बच्चे के अंगदान ने उन्हें एक नया जीवनदान दिया.

अंगदान के प्रति जागरूकता की जरूरत
इस ट्रांसप्लांटेशन को अंजाम देने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अगर देश में अंगदान के प्रति लोगों में और जागरूकता बढ़े तो लोगों की जिंदगी में एक बेहतरीन क्रांति आ सकती है. किडनी दान के प्रति भी लोगों में जागरूकता आनी चाहिए, जिससे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या जल्द से जल्द खत्म हो.



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