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DNA analysis road accidents in national capital delhi | DNA ANALYSIS: दिल्ली की सड़कों पर रात में ‘उड़ने’ का लाइसेंस?

नई दिल्ली: राजधानी की सड़कों पर अगर आप रात के समय निकलें तो यकीन नहीं कर पाएंगे कि ये वही चौड़ी खुली सड़कें हैं, जिन्हें आप दिन के समय देखते हैं. रात में दिल्ली की सड़कों पर ट्रकों का आतंक होता है. बड़े-बड़े ट्रक और ट्रैक्टर रात के समय दिल्ली की सड़कों पर ऐसे दौड़ते हैं मानो उनके लिए कोई नियम-कानून ही न हों. अक्सर कहा जाता है कि सड़क पर सावधानी के साथ गाड़ी चलाएं, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर जो हालत है, उसमें आपको किसी दूसरे की असावधानी की कीमत भी अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है.

बीते सप्ताह दिल्ली में चार दिन के अंदर तीन बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं. जिनमें उन लोगों की जान गई, जिनकी शायद कोई गलती नहीं थी.

रविवार को पश्चिमी दिल्ली के मोतीनगर में एक कार और ट्रैक्टर की टक्कर में 3 लोगों की जान चली गई. इस हादसे में एक व्यक्ति बुरी तरह घायल हो गया. ट्रैक्टर पर जो लोहे की रॉड्स लदी हुई थीं और वो काफी बाहर तक निकली हुई थीं. पीछे से एक कार आ रही थी. कार चला रहे व्यक्ति को लोहे की रॉड नहीं दिखाई दी और उसकी कार ट्रैक्टर में पीछे से जा टकराई. जहां पर ये दुर्घटना हुई वहां पर स्ट्रीट लाइट भी काम नहीं कर रही थी और घना अंधेरा था.

बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर फ्लाईओवर पर बीच में खड़ा था, क्योंकि उसका टायर पंक्चर हो गया था. हालांकि पुलिस इससे इनकार कर रही है। जिन तीन लोगों की मृत्यु हुई है वो सभी दिल्ली के ही रहने वाले हैं. इन तीनों के परिवार आजीविका के लिए इन पर निर्भर थे. 

सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं
ट्रैक्टरों की तरह ही दिल्ली की सड़कों पर आपको सरिया और आयरन रॉड लदे ट्रक दिनभर घूमते हुए दिखाई देंगे. ऐसे अधिकतर ट्रकों में सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं होते. ज्यादातर में सरिया का आधा हिस्सा पीछे की तरफ लटकता रहता है. ऐसे वाहन सबसे खतरनाक होते हैं क्योंकि पीछे से आने वालों को दूरी का सही अंदाजा नहीं लग पाता. दिल्ली में आए दिन इसी के कारण सड़क हादसे होते रहते हैं, लेकिन इसे लेकर न तो हमारी सरकारें गंभीर हैं और न ही पुलिस. इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण भ्रष्टाचार है. एक साल पहले के एक अध्ययन के अनुसार भारत में ट्रक ड्राइवर हर साल 48 हजार रुपए पुलिस को रिश्वत के तौर पर दे देते हैं और यही भ्रष्टाचार ऐसी दुर्घटनाओं की वजह बनता है.

दिल्ली में सड़कों की स्थिति कितनी भयानक है, इसके लिए आपको कुछ आंकड़ों पर गौर करना चाहिए-

– इस वर्ष सितंबर महीने तक दिल्ली की सड़कों पर ट्रक या दूसरे भारी वाहनों से कुल 72 बड़े एक्सिडेंट हो चुके हैं.

– इन सड़क हादसों में 74 लोगों की मृत्यु हुई है. गंभीर रूप से घायलों की संख्या 200 से अधिक होने का अनुमान है.

– पिछले सप्ताह जो 3 बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, उनमें कुल 7 लोगों की मृत्यु हुई है.

– वर्ष 2019 में दिल्ली में कुल 5,600 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें डेढ़ हजार से अधिक लोगों की जान गई.

सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटनाओं के लिए दोषी कौन?
प्रश्न उठता है कि देश की राजधानी में सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटनाओं के लिए दोषी कौन है? आज हमारे देश में यातायात से जुड़े कानून काफी सख्त हैं. नियम तोड़ने वाली गाड़ियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है.

पहले आपको दिल्ली में भारी वाहनों से जुड़े नियमों को जानना चाहिए-

– कोई ट्रक अपनी क्षमता और आकार से अधिक सामान नहीं ले जा सकता.

– कोई भी सामान ट्रक से बाहर निकला हुआ या लटकता हुआ नहीं होना चाहिए.

– जो भी सामान लादा गया हो उसे ट्रक पर मजबूती से बांधा जाना चाहिए. ताकि गिरने का डर न रहे.

– सामान ढोने वाले हेवी ट्रकों के पीछे लाल रंग का इंडिकेटर होना जरूरी है जो दूर से दिखाई देता हो.

– जहां तक ट्रैक्टर की बात है उसे कृषि के अलावा किसी और सामान ढोने में प्रयोग नहीं किया जा सकता. अगर ट्रैक्टर से कंस्ट्रक्शन का सामान ढोना हो तो उसका रजिस्ट्रेशन अलग से कराना होता है.

– मोटर वाहन कानून के तहत इन नियमों के उल्लंघन पर 20 हजार रुपये जुर्माना होता है. पुलिस चाहे तो गाड़ी भी जब्त कर सकती है.

दिन के समय भारी वाहन चलाने पर पाबंदी
इसके बावजूद दिल्ली की सभी प्रमुख सड़कों पर न सिर्फ रात में, बल्कि दिन में भी ऐसी गाड़ियां घूमती दिख जाती हैं. दिल्ली में सड़कों पर दिन के समय भारी वाहन चलाने पर पाबंदी है. रात में जब ये वाहन सड़कों पर निकलते हैं तो ऐसा लगता है मानो अब सड़क पर उनका राज हो. ऐसा बहुत कम होता है कि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करे. उन्हें एक तरह का लाइसेंस मिल चुका होता है कि वो सड़क पर जो चाहे करें, जैसे चाहे गाड़ी चलाएं.

यहां पर जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी क्योंकि, हर चौराहे पर पुलिस खड़ी नहीं रह सकती. जब भी हम सड़क पर ऐसे किसी वाहन को ट्रैफिक के नियम तोड़ते देखते हैं तो हम उसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए पुलिस तक पहुंचा सकते हैं. ये जनता की भी जिम्मेदारी है कि वो यातायात के नियमों के उल्लंघन को देखते ही रिपोर्ट करे.



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