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The business of lies is flourishing on social media |सोशल मीडिया पर फल-फूल रहा है झूठ का कारोबार, इस केस में बने 80 हजार फर्जी अकाउंट

मुंबई: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के 14 जून को सुसाइड करने के बाद करीब 80,000 फेक सोशल मीडिया (Social Media) अकॉउंट्स बनाकर मुंबई पुलिस के काम पर सवाल खड़े किए गए. अब मुंबई पुलिस की साइबर यूनिट ने उन तमाम फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है. 

चौकाने वाली बात ये है कि इनमे से कई एकाउंट्स तो भारत से नही बल्कि इटली, थाईलैंड, फ्रांस, इंडोनेशिया, टर्की जैसे देशों से ऑपरेट किये जा रहे है. कई एकाउंट्स ऐसे है जो साल 2010 या उसके आस पास बने लेकिन उन्हें एक्टिव अब किया गया है. इन सभी एकाउंट्स के ज़रिये #justiceforsushant या #SSR जैसे ट्रेंड किये जा रहे है. 

मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने कहा है कि सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ  प्रोपोगंडा किया गया है. अब IT एक्ट के तहत साइबर सेल इस तरह के फेक एकाउंट्स की पूरी जांच कर रही है.

जानकारी के मुताबिक Social Media Memes का बिजनेस मार्केट करोड़ों रुपये में जा चुका है. दिन रात कम्पनी सिर्फ meme पर ही काम करती है. एक meme से भी लाखों रुपये बनाये जा सकते है. सच और झूठ का meme से नाता नही है.

Twitter, Facebook, YouTube पर जो कंटेंट या  Fake News डाली जाती हैं, उसको पोस्ट करने से पहले  चेक करने का कोई तरीका नही है. इंटरनेट की सोशल मीडिया साइट्स पर   70 फीसदी खबरे झूठी होती है. इनको जांचने का कोई तरीका नही है.

हालांकि बड़े न्यूज प्लेटफार्म जाँच करने के लिए सॉफ्टवेयर उपयोग में लाते हैं, लेकिन वे भी सिर्फ अभद्र कंटेट के लिए. झूठ और सच के दायरों  को सोशल मीडिया पर जांचना बहुत मुश्किल है.

यदि कोई ऐसी खबर जो कि सही न हो और फेक न्यूज  निकल जाए तो उस स्थिति में खुद समय लेकर उसको 3-4 अलग जगहों से परखना सही है. यदि कोई व्यक्ति गलत खबर या अफवाह गलती से भी शेयर करता है तो उसको जेल तक हो सकती है. उसे छोटी सी पोस्ट के कारण भारी जुर्माना तक भरना पड़ सकता है. 

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