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Bihar Election 2020; Plurals Party Candidates First List Announcement Updates | Here’s Latest News From Pushpam Priya Choudhary | पुष्पम प्रिया की पार्टी प्लूरल्स ने 40 उम्मीदवारों का ऐलान किया, प्रत्याशियों के धर्म के कॉलम में बिहारी तो जाति की जगह उनका पेशा लिखा

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पटना24 मिनट पहले

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पुष्पम प्रिया चौधरी की पार्टी प्लुरल्स की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उसमें दिल्ली के अरविंद केजरीवाल का मॉडल दिख रहा है।

  • पुष्पम प्रिया ने जिन 40 प्रत्याशियों की सूची जारी की है, वह पहले किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े थे
  • प्लूरल्स ने जिनको प्रत्याशी बनाया है, उनमें ज्यादातर डॉक्टर, इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता

रातों रात अखबार में इश्तेहार के जरिए बिहार की राजनीति में दस्तक देने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी की पार्टी प्लूरल्स ने रविवार को बिहार चुनाव के फर्स्ट फेज के प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। सूची में प्रत्याशियों की जाति के स्थान पर पेशा और धर्म बिहारी लिखा गया है। सोशल साइट पर इस सूची को खूब शेयर की जा रही है। पार्टी ने जिन 40 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, वह सभी साफ-सुथरी छवि के हैं।

इसमें सबसे अधिक सामाजिक मुद्दों पर काम करने वाले एक्टिविस्ट, डॉक्टर और अन्य पेशेवर लोग हैं। इनमें से कोई भी प्रत्याशी किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है। यानि पार्टी ने साफ-सुथरी छवि वाले प्रत्याशियों के बल पर चुनाव लड़ना चाह रही है।

राजनीतिक विशेषज्ञ इसे बिहार में चुनाव की नई स्ट्रैटजी मान रहे हैं, जिसे दिल्ली के अरविंद केजरीवाल मॉडल से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा पुष्पम ठेठ बिहारी वाले इमेज को भी भुना रही हैं, जिसे पीएम मोदी के लोकल फॉर वोकल के जरिए वोट की नीति भी समझा जा रहा है।

जाति का नहीं पता धर्म है बिहारी
पार्टी ने सूची में उम्मीदवारों की जाति के कॉलम में उनका पेशा लिखा है। वहीं, धर्म के कॉलम में बिहारी बताया गया है। इससे पुष्पम ने यह मैसेज देने की कोशिश की है वह बिहार में जाति और धर्म के आधार पर चुनाव नहीं लड़ना चाह रही हैं।

नाम विधानसभा क्षेत्र जाति धर्म
विजय कुमार यादव कहलगांव प्रोफेसर बिहारी
किरण मिश्रा सुल्तानगंज सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
डॉ. अजय सिंह अमरपुर डॉक्टर बिहारी
पूजा कुमारी धौरैया सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
काशीकांत सिंह बांका रिटायर्ड नौसैनिक बिहारी
सुषमा हेमब्रम कटोरिया एसएचजी लीडर बिहारी
श्वाति कुमारी बेलहर सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
रवि रंजन कुमार सूरज तारापुर सोशल डेवलपमेंट एक्सपर्ट बिहारी
शालिनी कुमारी मुंगेर रिसर्च स्कॉलर बिहारी
सुधीर कुमार लखीसराय इंजीनियर बिहारी
डॉ. ममतामयी प्रियदर्शनी बिक्रम उद्यमी बिहारी
पूजा सिंह बड़हरा शिक्षक बिहारी
आनंद राय आरा सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
धनंजय रजक अगियांव सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
कैप्टन रोहित सिंह तरारी मर्चेंट नेवी बिहारी
अविनाश कुमार चंद्रा शाहपुर पूर्व छात्र नेता बिहारी
गीता देवी राजपुर सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
इंद्रेश सिंह रामगढ़ व्यवसायी बिहारी
सोनू कुमारी मोहनिया सोशल एक्टिविस्ट बिहारी
कृष्णकांत तिवारी भभुआ व्यवसायी बिहारी
रंजीत कुमार दिनारा मुखिया बिहारी
पुष्पम प्रिया चौधरी मिथिला की हैं। पीएम मोदी की तर्ज पर ये चुनाव प्रचार में लोकल पुट वाली राजनीति साध रही हैं। इसलिए ये जहां जाती हैं, वहां की महिलाओं से खोंयछा जरूर लेती हैं।

पुष्पम प्रिया चौधरी मिथिला की हैं। पीएम मोदी की तर्ज पर ये चुनाव प्रचार में लोकल पुट वाली राजनीति साध रही हैं। इसलिए ये जहां जाती हैं, वहां की महिलाओं से खोंयछा जरूर लेती हैं।

खोंयछा से लोकल बन वोट जुटाने की कोशिश
बिहार से चुनाव लड़ना है तो बिहारीपन दिखाना होगा। पुष्पम प्रिया चौधरी भी ऐसे ही हथकंडे अपना रही हैं। पीएम मोदी की तर्ज पर ये वोटरों से लोकल पुट वाली राजनीति साध रही हैं। मिथिलांचल से ताल्लुक रखने वाली पुष्पम ‘खोंयछा’ से महिला वोटरों का हाथ मांग रही हैं। सोशल मीडिया पर खोंयछा लेते हुए कई तस्वीरें इनकी वायरल हो रही हैं।

इसको लेकर उन्होंने अपने वॉल पर लिखा है खोंयछा मेरी राजनीति की जमापूंजी है। सब नौकरी पाए, सब अमीर बनें, सब आगे बढ़े। दरअसल, मिथिला में खोंयछा को सौभाग्य का द्योतक माना जाता है। जब बेटियां घर से बाहर आती हैं या फिर कहीं से घर आती हैं तो परिवार की सुख समृद्धि के लिए उन्हें खोंयछा दिया जाता है।

हालांकि, यह विवाहिताओं को देने की परंपरा रही है लेकिन इसके सार में बेटियों की सुख-समृद्धि और विकास ही है। मान्यताओं के अनुसार खोंयछा में अगर बेटियों को अन्न का एक दाना और एक सिक्का भी दे दिया जाए तो ये समृद्धि का द्योतक माना जाता है। पुष्मम खोंयछा जैसी लोकसंस्कृति को अपने प्रचार अभियान में भुना रही हैं। चुनावी दौरे में वह जहां भी जा रही हैं वहां वह महिलाओं से आर्शीर्वाद के रूप में खोंयछा ले रही हैं।

दिल्ली के मॉडल पर बिहार में बदलाव
पुष्पम प्रिया चौधरी की पार्टी प्लुरल्स की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उसमें दिल्ली के अरविंद केजरीवाल का मॉडल दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी भी ऐसे साफ सुथरे चेहरे वालों के सहारे दिल्ली की सत्ता में आई थी। बिहार में भी ऐसे ही काम किया जा रहा है।

राजनीतिक विषयों पर काम करने वाले सुनील सिन्हा बताते हैं कि अब कई पार्टियां इसी को आधार बनाते हुए प्रत्याशी खड़ी कर रही हैं। उनका कहना है कि जनता जाति और धर्म की राजनीति से उब चुकी है, वह बदलाव चाहती है। ऐसे में साफ सुथरी छवि के लोगों को साथ लेकर कुछ पार्टियां दिल्ली का मॉडल तैयार रही हैं। पुष्पम प्रिया चौधरी की पहली सूची भी ऐसी ही है।

कंटेंट: मनीष मिश्रा

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