Bicycle shortage in India, advance booking start in many places | Albert Einstein के इस फॉर्मूले के कारण बड़ी साइकिल की डिमांड, शुरू हुई एडवांस बुकिंग

नई दिल्ली: मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) ने कहा था जिंदगी साइकिल (Bicycle) चलाने जैसी है, जिसका संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार चलते रहना जरूरी है. इस सबक को लोगों ने हाथों हाथ ले लिया है. कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के दौर में लोगों ने संतुलन बनाने और चलते रहने के लिए साइकिल को अपनाया है. जिससे देश की राजधानी दिल्ली समेत हर छोटे-बड़े शहर में साइकिल की शॉर्टेज हो गई है.

प्री बुकिंग वाला साल बना 2020
हाइब्रिड कारों और स्टाइलिश बाइक के जमाने में लोग हाइब्रिड साइकिल, माउंटेन बाइक और दो पहिया साइकिल की नई-नई किस्में खरीदने में लगे हैं. आपने कार खरीदते हुए एडवांस बुकिंग की होगी और वेटिंग लिस्ट में अपनी पसंद की कार का इंतजार किया होगा, लेकिन 2020 साइकिल की वेटिंग लिस्ट और प्री बुकिंग वाला साल बन गया है.

ब्रिकी में इस साल आया 55% का उछाल
साइकिल की दुकानों पर स्टॉक खत्म है और सेल बंपर है. ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के मुताबिक भारत में हर साल औसतन 2 करोड़ साइकिल बेची जाती हैं. साइकिल उद्योग हर साल 5 फीसदी की हर से विकास करता है, लेकिन इस साल साइकिल की खरीदारी में 55 प्रतिशत का उछाल आया है. इसीलिए बड़े ब्रांड हों या लोकल मार्किट, सभी जगह साइकिल की शार्टेज है.

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देश को इतने करोड़ रुपये का होगा फायदा
2019 में The Energy and Resource Institute (TERI) की एक स्टडी में पाया गया कि अगर छोटी दूरियों के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया जाए तो देश को 1.8 लाख करोड़ का फायदा हो सकता है. लेकिन क्या हमारा देश साइकिल के लिए तैयार है? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं-क्या हमारे देश में साइकिल चलाने के लिए ट्रैक या अलग साइकिल लेन की व्यवस्था है? क्या आपको ऐसी सड़क नसीब है जिस पर गड्ढे ना हों, तेज रफ्तार वाहनों से एक्सीडेंट का खतरा ना हो और आप साइकिल चलाते वक्त सुरक्षित रहें. 

लॉकडाउन में बढ़ी साइकिल की मांग
दरअसल, महामारी के कारण जिम बंद हैं और ट्रांसपोर्ट के साधनों पर लॉकडाउन लगा तो कई लोगों ने फिट रहने के लिए साइकिल चलानी शुरू की. कुछ लोगों ने छोटी दूरी के सफर के लिए साइकिल को चुना.

दिल्ली-एनसीआर में साइकिल चलाना कितना सुरक्षित
आज हमने देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर से एक रिएलिटी टेस्ट किया है, जिसमें हमने ये समझने की कोशिश की है कि आपके साइकिल के शौक और देश की सड़कों की असलियत के बीच कितना तालमेल है. अफसोस की बात ये है कि दुनिया के सबसे पुराने यातायात के तरीके साइकिल को अपनाने के लिए सड़कें हमें तैयार नजर नहीं आई.

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सड़कों पर आते ही सुस्त पड़ रही साइकिल की रफ्तार
लेकिन रफ्तार पकड़ रही साइकिल सड़क पर आते ही सुस्त पड़ रही है. भारत की सड़कों को बनाते वक्त साइकिल योजना का हिस्सा ही नहीं रही. दिल्ली नोएडा जैसे भारत के कुछ शहरों में साइकिल ट्रैक तो हैं, लेकिन कहीं दोपहिया वाहनों का कब्जा, तो कहीं साइकिल ट्रैक पर दुकानें सजी हैं. साइकिल ट्रैक का डिजाइन इतना खराब है कि यहां पर ना तो साइकिल चलाना सुरक्षित है और ना ही आरामदायक. साइकिल चलाने से न सिर्फ फिटनेस अच्छी होती है बल्कि ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और पेट्रोल के खर्च से भी निजात मिलती है. लेकिन जब साइकिल चलाना जान पर भारी पड़ने लगे तो भला कोई साइकिल चलाने की हिम्मत कैसे करेगा.

अचानक खत्म हो जाता है साइकिल ट्रैक
ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट डॉक्टर सेवाराम ने बताया कि भारत में बने ज्यादातर साइकिल ट्रैक का हाल ऐसा ही है. ये ट्रैक अचानक खत्म हो जाता है. साइकिल सवार को मुख्य सड़क पर साइकिल चलाने के लिए मजबूर होना पड़ता है. साइकिल चलाने वालों के लिए अलग से सिग्नल सिस्टम भी नहीं है और जैसे ही लाइट ग्रीन होती है सारा ट्राफिक एक साथ चलने लगता है और यह साइकिल सवारों की जान पर भी भारी पड़ जाता है.

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दिल्ली के 11 लाख लोगों के लिए सिर्फ 100 किलोमीटर का है साइकिल ट्रैक
अर्थशास्त्री शरद कोहली ने बताया कि आईआईटी दिल्ली और रुड़की की एक स्टडी के मुताबिक सिर्फ दिल्ली में ही 11 लाख लोग साइकिल की सवारी करते हैं, लेकिन साइकिल ट्रैक सिर्फ 100 किलोमीटर का है. जो ट्रैक बने हैं उनकी हालत आपके सामने है। हालांकि योजनाएं जरूर बनी हैं. शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार ने ‘साइकिल 4 चेंज’ की मुहिम शुरू कर दी है, जिसके तहत दिल्ली समेत सभी स्मार्ट शहरों में साइकलिंग ट्रैक बनाए जाएंगे. इस से देश में करीब 25 करोड़ लोगों को फायदा हो सकता है. जब तक ये ट्रैक बनते हैं हम आपकी सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना ही कर सकते हैं.

(इनपुट- रूफी जैदी और पीयूषा शर्मा से भी)

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