Know the Patriotism story of Ghulam Mohammad Mir from Jammu and Kashmir | J&K: आतंकी हमले में 12 गोलियां लगीं, टांगे हुईं बेजान, लेकिन आज भी लोग दे रहे इनकी देशभक्ति की मिसाल

श्रीनगर: आतंकवादियों (Terrorists) की 12 गोलियां लगने के बाद भी दक्षिण कश्मीर (Jammu & Kashmir) के पुलवामा का एक सरपंच देशभक्ति की नई मिसाल कायम कर रहा है. हमले में भले ही सरपंच गुलाम मोहम्मद मीर के दोनों पैर बेजान हो गए हो, लेकिन देशभक्ति का जुनून उनमें अब भी कायम हैं. गुलाम मोहम्मद मीर (Ghulam Mohammad Mir) कहते हैं कि उनके खून की हर बूंद राष्ट्र के लिए है. राष्ट्र की सेवा में अगर उन्हें अपने शरीर से खून की आखिरी बूंद भी देनी पड़ी तो वो पीछे नहीं हटेंगे. वह भारतीय थे और एक भारतीय ही मरेंगे.

आज ही के दिन आतंकवादियों से हुआ था आमना सामना
गुलाम मोहम्मद मीर को आतंकियों ने वर्ष 03 सितंबर 2001 में उनके घर के बाहर 12 गोली मारी थीं. खून से लथपथ हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस दौरान डॉक्टरों ने उनकी कई सर्जरी की थी, जिसके बाद उनकी जान बच पाई थी. मीर बताते हैं कि 19 साल बाद भी उस हमले की याद उनका पीछा नहीं छोड़ती. उस हमले के बाद भले ही वो शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हों लेकिन देश के लिए वो आज भी सच्चे मन से काम कर रहे हैं. 

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एक सवाल पूछा और जवाब सुनते ही आतंकवादियों ने बरसाईं गोलियां
मीर बताते हैं कि एक आतंकी ने उनसे सवाल किया था कि तुम कहां गए थे. तो मीर ने बताया कि कुछ ग्रामीणों की गायें खो गई थीं और हम उसे मामले को सुलझा रहे थे. ये बात सुनकर आतंकवादियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं. करीब 60 गोलियां चलाने के बाद वो वहां से भाग गए. इस फायरिंग में मेरी टांग में 12 गोलियां लगीं. अस्पताल में इलाज हुआ और मेरी जान बच गई. लेकिन मुझे दुःख है सरकार ने मेरे लिए कुछ नहीं किया और मुझे अपने इलाज के लिए सब कुछ बेचना पड़ा.

इस साल नई पार्टी की संभाली कमान
मीर ने 2018 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पंचायत चुनाव लड़ा था. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ब्लॉक डिवेलप्मेंट काउंसिल के चुनाव भी जीते थे. इस साल की शुरुआत में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया और पार्टी का हिस्सा बन गए. और आज मरी भाजपा को कश्मीर में मजबूत करने में जुटे हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से घाटी में भाजपा सदस्यों और सरपंचों पर खतरा मंडरा रहा है. लगातार उन्हें निशाना बनाकर उनकी हत्याएं की जा रही हैं. तभी से सभी कार्यकर्ताओं को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है. मीर इन हमलों के लिए एनसी और पीडीपी जैसे क्षेत्रीय दलों को जिम्मेदार ठहराता है.

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NC और PDP के राजनेताओं के रिहा होने के बाद शुरू हुईं हत्याएं
मीर ने बताया कि जब सरकार ने NC और PDP को बांध रखा था तब घाटी में इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई. लेकिन कई लोगों के रिहा होने के बाद ये हत्याएं शुरू हुईं. मुझे संदेह है कि यह उनके इशारे पर किया जा रहा है. हिज्ब सलाउद्दीन ने कहा था कि सरपंच को मत मारो, लेकिन जब से इन राजनेताओं को रिहा किया गया तब से यह सब होना शुरू हो गया. मीर ने कहा कि सरकार से जल्द से जल्द पंच और सरपंच को सुरक्षा देनी चाहिए. 

पुलवामा से चुनाव लड़ना चाहते हैं मीर
मीर की योजना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में वे पुलवामा से चुनाव लड़ें. उन्होंने बताया कि ये चुनाव वो गरीब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ेंगे और उन्हें समझाएंगे कि कैसे भारत और पीएम मोदी कश्मीर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं.

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