Cyber cell curbed crime and terror in Kashmir | J&K: भारत विरोधी प्रोपेगेंडा पर रोक लगाने के लिए साइबर सेल ने की कड़ी कार्रवाई

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी झूठ के प्रोपेगेंडा का स्थाई इलाज मिल गया है.  इसे एजेंसियों को मिली बड़ी कामयाबी भी कह सकते हैं, जो कश्मीर की साइबर सेल के जरिए मिली. दरअसल कश्मीर घाटी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बहुत सारे फर्जी एकाउंट्स और फेक न्यूज के प्रोपेगेंडा से जूझ रही है. और इस पर रोक लगने के लिए कश्मीर की साइबर सेल ने कड़ी कार्रवाई की है. साइबर सेल के एसपी ताहिर अशरफ के मुताबिक फर्जी प्रोफाइल (Fake Profile) और फेक एकाउंट्स के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था. 

पाकिस्तान की फेक न्यूज फैक्ट्री बंद होगी
कश्मीर साइबर सेल के रडार पर लगभग  500 प्रोफाइल हैं, वहीं एक हजार से ज्यादा अकाउंट की पड़ताल करके आतंकी मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया. दर्जनों संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया वहीं उनसे हुई पूछताछ के हिसाब से लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा गया. गौरतलब है कि इन्ही वजहों से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35 A के हटने के बाद, घाटी में इंटरनेट बंद कर दिया गया था.

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भारत के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने सीमा पार से चलाए जाने वाली प्रोफाइलों में जबर्दस्त इजाफा किया. इस प्रोपेगेंडा मुहिम के तहत अब आतंकवादी फर्जी वीडियो के जरिए जहां दहशत फैला रहे हैं वहीं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट्स को धमकाने के साथ घाटी की कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना चाहते हैं.  

देश द्रोहियों की पहचान हुई आसान
फेक न्यूज और फर्जी वीडियो पोस्ट करने वाले ज्यादातर लोग पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर से भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं. हाल ही में आईजी कश्मीर विजय कुमार का फेक एकाउंट फेसबुक पर बनाया गया था. इस आईडी से कई पत्रकारों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई थी. इसके बाद आईजी कश्मीर ने इस फेक एकाउंट की जानकारी देते हुए सभी से सतर्क रहने को कहा था. साइबर पुलिस स्टेशन  ने 22 अगस्त को FIR दर्ज करने के साथ मामले की तहकीकात शुरू की और इस फेक एकाउंट को बंद कराया. साइबर सेल एसपी के मुताबिक कश्मीर के आईजी का अकाउंट बनाने वाला शख्स हरियाणा का था और उन्होने फौरन हरियाणा पुलिस के साथ ये जानकारी साझा की. 

साइबर थाने को मिली ये कामयाबी 
साइबर सेल ने घाटी का अमन चैन बिगाड़ने की कई कोशिशों को नाकाम किया है वहीं सुरक्षा बलों को भी इससे काफी मदद मिली है. दरअसल सुरक्षा बलों से मुठभेड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल किए जाने के साथ लोगों को मुठभेड़ स्थल पर भीड़ जुटाने को कहा जाता था, लेकिन अब ये काम पूरी तरह बंद हो गया है. वहीं कई दर्जन वाट्सएप ग्रुप पर एकसाथ कार्रवाई करने की वजह से जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है. साइबर सेल हिंसा फैलाने वालों पर नजर रखती है. 

गौरतलब है कश्मीर में साइबर सेल के गठन के बाद पाकिस्तान के आतंकी आकाओं के मंसूबों पर पानी फिरा है, वहीं स्थानीय युवकों के आतंकी संगठनों में भर्ती होने के मामलों में काफी कमी आई है. 

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