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RBI ने कहा कि गंभीर तनाव में बैंक NPA बढ़कर 25 साल हो सकता है कोरोना प्रभाव: RBI की चेतावनी, बैंक NPA 14.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, यह 25 साल का सबसे उच्च स्तर होगा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बैंकों को लेकर आरबाई ने गंभीर चेतवानी दी है। भारत में बैंकों का बैड लोन रेशियो बेसलाइन स्ट्रेस सिनेरियो में 600 बेसिस पॉइंट तक 13.5% तक पहुंच सकता है। अगर मैक्रोइकोनॉमिक इनवॉयरमेंट और खराबकर सीवर स्ट्रेस सिनेरियो में तब्दील होता है तो ग्रॉस एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) रेशियो सितंबर 2021 तक 14.8 फीसदी हो सकता है, जो कि 25 साल का उच्च स्तर होगा। आरबीआई ने सोमवार को खुली फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट जारी की, जिसमें ये बात कही गई है।

बेसलाइन सिनेरियो के तहत, यह 23 वर्ष का उच्च होगा। बैंकों का ग्राउंड बैड लोन रेशियो 30 सितंबर 2020 में 7.5 प्रतिशत रहा। वहीं मार्च 2020 में यह 8.4% था। आरबीआई के डेटा के मुताबिक पिछली बार बैंकों ने इस तरह का एनपीए 1996-97 में देखा था। उस समय यह 15.7% था। दरअसल, कोरोना महामारी इकोनॉमी पर कहर बनकर टूटी है। इसमें कई लोगों की नौकरी चली गई और वह बेरोजगार हो गया। इस कारण से कई लोगों के बैंकों से कर्ज नहीं लिया गया।

यदि केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात की जाए तो रिफलाइन सिनेरियो के तहत GNPA रेशियो सितंबर 2020 में 9.7 प्रतिशत थी। सितंबर 2021 तक 16.2 प्रतिशत हो सकता है। सितंबर 2020 में निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों में GNPA रेशियो 4.6 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत था। जो सितंबर 2020 में क्रमश: 7.9 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत हो सकता है।

सेल फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि सीवर स्ट्रेस सिनेरियो में GNPA रेशियो सितंबर 2021 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 17.6 प्रतिशत से अधिक, निजी क्षेत्र के बैंकों में 8.8 प्रतिशत और विदेशी बैंकों में 6.5 प्रतिशत हो सकती है। वहीं आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार कोरोना के कारण सरकार को रेवेन्यू कम मिल रहा है। खर्च करने के लिए वह बाजार से ज्यादा कर्ज ले रहा है। इससे बैंकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

क्या होता है एनपीए?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक अगर कोई बैंक लोन की उसस्त या लोन में 90 दिन तक यानी तीन महीने तक नोटबंदया जाता है तो उसे नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) मान लिया जाता है। अन्य वित्तीय संसाधनों के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। यानी अगर कोई लोन की ईएमआई लगातार तीन महीने तक न जमा की जाए तो बैंक उसे एनपीए घोषित कर देते हैं। एनपीए का मतलब यह है कि बैंक उसे फांसा हुआ कर्ज मान लेते हैं। एनपीए किसी भी बैंक की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।



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