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गेहूं सहित सभी रबी फसलों की बुवाई तेज, बारिश से होगा फायदा | तमाम रबी फसलों की बुआई तेज, बारिश से फायदा होगा

नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। गेहूं, सरसों और चना सहित रबी फसलों की बुवाई पूरे भारत में तेज हो गई है और मौसम अनुकूल होने से देश के विभिन्न भागों में रबी फसलों की बुवाई आने वाले दिनों में और जोर पकडती है।

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में जहां कहीं भी बारिश हुई है वहां पहले बुवाई हो चुकी रबी फसलों को तो फायदा होगा ही, जहां अभी बुवाई नहीं हुई है वहां खेतों में नमी हो जाने से बुवाई आसान हो जाएगी।

मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान में गेहूं, सरसों, चना और अन्य फसलों की बुवाई काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी और कहीं-कहीं बुवाई समाप्त भी हो चुकी है, जबकि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में इस समय गेहूं की बुवाई तेज हो गई है।

कृषि विशेषज्ञों और किसानों से मिली जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में गेहूं की बुवाई करीब 50 फीसदी से ज्यादा पूरी हो गई है, जबकि पंजाब में किसानों ने 30 से 40 फीसदी गेहूं की बुवाई कर ली है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में मुख्य रूप से गेहूं की बुवाई 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच होती है, जबकि गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बुवाई थोड़ी जल्दी शुरू हो जाती है। मध्य प्रदेश के इंदौर जिला के किसान नागू ने बताया कि उनके इलाके में गेहूं की बुवाई अंतिम चरण में है और किसानों ने इस बार गेहूं के बदले कुछ जमीनों में आलू और लहसुन की खेती की है।

उज्जैन के जींस व्यवसाय संदीप सारदा ने कहा कि मध्यप्रदेश पिछले सीजन में किसानों को गेहूं का अच्छा भाव मिला, जिससे उत्साहित किसानों की विचारों की खेती में बनी हुई है, लेकिन गेहूं का कुछ रकबा आलू और लहसुन में हो सकता है, क्योंकि सेसे किसान है ज्यादा लाभकारी लग रहा है, जाहिर है कि आलू और लहसुन काफी महंगे हैं।

राजस्थान के कोटा के व्यापारी उत्तम जेठवानी ने भी बताया कि उनके इलाके में गेहूं के बदले लोग चना, सरसों और लहसुन की खेती में दिख रहे हैं, क्योंकि उनकी अभिव्यक्ति काफी उंचे हैं जबकि गेहूं का भाव इस समय कम है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आरबी फसलों के आंकड़ों के अनुसार, चालू आरबी बुवाई सीजन में छह नवंबर तक देशभर में गेहूं की बुवाई 16.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी, जोकि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 74.27 फीसदी अधिक है।

वहीं, चना का रकबा पिछले साल से 43.59 प्रतिशत बढ़कर 15.10 लाख हेक्टेयर हो गया था। वहीं, दलहनी फसलों का रकबा पिछले साल से 11.64 लाख हेक्टेयर बढ़कर 36.43 लाख हेक्टेयर हो गया था।

पीएमजे / एएनएम



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