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धान खरीद तेज, दशहरे के बाद दालें उठेंगी तेजी | धान की खरीद तेज, दशहरा के बाद जोर पकड़ेगी दलहनों की आवक

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है। सरकारी एजेंसियों ने बीते दो सप्ताह में लगभग 38 लाख टन धान की खरीद कर ली है। जबकि दलहन और तिलहनी फसलों की आवक और एमएसपी पर खरीद जोर के लिए दशहरा तक इंतजार करना पड़ेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद हालांकि उत्तर भारत की मंडियों में शुरू हो चुकी है, लेकिन इसका प्रवाह भी अभी तक रुक रहा है।]

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ विपणन सीजन 2020-21 में धान की खरीद धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है और 10 अक्टूबर तक सरकारी एजेंसियों ने 37.92 लाख टन धान खरीद लिया था।

भारतीय खाद्य निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि पंजाब और हरियाणा में धान की खरीद धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है।

मंडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ती जा रही है।]

मँत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, TN और हरियाणा में सरकार ने नोडल एजसियों के जरिये 10 अक्टूबर तक 459.60 टन मूंग की खरीद ड्रिलपी पर की है।

देश में किसानों से एमएलपी पर दलहनी व तिलहनी फसलों की खरीद राष्ट्रीय एकग्रकल्चर को-आपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) द्वारा की जाती है। नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा ने आईएटीसी को बताया कि दहलनों की अभी आवक नहीं है और जो आवक है वह गीला ज्यादा है, लेकिन अक्टूबर के आखिर में तय मानक के अनुरूप उड़द की फसल आने लगेगी तब होगी शुरू।

उन्होंने कहा कि उड़द की आवक सबसे पहले दक्षिण भारत की मंडियों में शुरू होती है। अभी किसान एमसपी पर फसल बेचने के लिए पंजीकरण करवा रहे हैं। दलहन फसलों की ज्यादा खरीद का मूल्यांकन और मध्यप्रदेश में होता है, जबकि मूंगफली की खरीद गुजरात में होती है।

दहलान व तिलहन फसलों की सरकारी खरीद सरकार तब शुरू करती है, जब इन फसलों की कारों के बाजार में एमएसपी से नीचे से आये होते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने चालू खरीफ सीजन में 30.70 लाख टन दलहन और तिलहन फसलों की खरीद की मंजूरी दी है।

उत्तर भारत में कपास की खेती पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में होती है और तीनों राज्यों में कपास की आवक सितंबर में ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन सरकारी खरीद की औसत गिरावट है। किसानों से एमएसपी पर कपास की सीधी खरीद भारत कपास निगम (सीसीआई) द्वारा की जाती है।

सीसीआई के मुताबिक, कपास की खरीद बंद होने की वजह कपास की फसल में तय मानक से ज्यादा नमी है। तय मानक के अनुसार, सीसीआई कपास में आठ प्रतिशत से 12 प्रति तक नमी रहने पर ही किसानों से कपास खरीदती है।

जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर तक सीसीआई ने 24,863 गांठ (प्रत्येक गांठ में 170 किलो) कपास की खरीद की थी।

सीसीआई के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) प्रदीप अग्रवाल ने बीते सप्ताह आईएन्ट को बताया कि उत्तर भारत में सभी कपास खरीद केंद्र खुले हैं, लेकिन कपास की फसल में नमी काफी ज्यादा होने की वजह से एमएसपी पर खरीद कम हो रही है। उन्होंने बताया कि दशहरा के त्योहार के बाद कपास की खरीद जोर पकड़ सकती है। सीसीआई ने चालू कपास सीजन 2020-21 (अक्टूबर-अक्टूबरंबर) में 125 लाख गांठ कपास की खरीद का लक्ष्य रखा है।

पीएमजे / एसजीके



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