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त्योहारी खरीदारी के लिए डिप्रेस्ड गारमेंट सेक्टर की उम्मीदें | उदास रहने वाले सेक्टर को त्योहारी खरीदारी से बड़ी आस

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। वस्त्र, परिधान की रैक घरेलू मांग में कमी के नतीजों से जूझ रहे सेक्टर को त्योहारी खरीदारी से बड़ी उम्मीद है, इसलिए कपड़ा उद्योग में हर स्तर पर कारोबार में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगा है। आगे सर्दियों में गर्म-नरम कपड़ों की खरीदारी को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न कंपनियों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। वहीं, कॉटन, यार्न और नए एक्स के मोर्चे पर भी रिकवरी आई है।

देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाले कपड़ा उद्योग में रिकवरी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है। कपड़ा उद्योग का शीर्ष संगठन कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (टीटीआई) के पूर्व चेयरमैन संजय जैन ने आईएएनएस को बताया कि कपड़ों की घरेलू मांग अभी तक उतार ही है, लेकिन लॉकडाउन में चरणबद्ध तरीके से ढील मिलने के साथ-साथ सुधार देखा जा रहा है। । उन्होंने बताया कि कपड़ा उद्योग में सुधार बीते तीने महीने से देखा जा रहा है, लेकिन शादी या पार्टी जैसे आयोजनों के लिए महंगे कपड़ों की खरीदारी नहीं हो रही है।

पंजाब का पंजाब शहर उत्तर भारत में होजियारी उद्योग का एक बड़ा केंद्र है, जहां इन दिनों उनी कपड़े बनाने में कारोबारियों ने पूरी ताकत झोंकी है। उनका कहना है कि देशभर में अब बाजार खुल रहे हैं और लोग घरों से बाहर निकलने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में खरीदारी बढ़ जाएगी।

निटवेअर और अपेरल मन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ ऑन के प्रेसीडेंट सुदर्शन जैन ने कहा कि आगे त्योहारी सीजन में खरीदारी जोर पकड़ सकती है, क्योंकि लोग अब घरों से बाहर निकलने लगे हैं। उन्होंने कहा कि आगे सर्दी का मौसम शुरू होने जा रहा है, जब ऊनी कपड़ों की मांग रहेगी, इसलिए व्यवसाय ऊनी कपड़े बनाने पर ज्यादा ध्यान देने वाले हैं।

सुदर्शन जैन ने बताया कि उद्योग में कामकाज बढ़ने से लोगों को रोजगार भी मिला है, लेकिन अभी तक कपड़ा उद्योग में 50-60 प्रति क्षमता के साथ ही काम कर रहा है।

संजय जैन बताते हैं कि देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला कपड़ा उद्योग है, जहां प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को काम मिलता है, लेकिन कोरोना काल में उनके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि इस उद्योग में कामकाज धीरे-धीरे पटरी पर लौटने से उन्हें काम मिलना शुरू है।

उन्होंने बताया कि एक्सप के मोर्चे पर भी रिकवरी है। उन्होंने बताया कि योनी और फेब्रिक सहित विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में बीते महीनों के दौरान सुधार हुआ है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले कम समय है। उन्होंने बताया कि योनी का एक्सप बांग्लादेश को ज्यादा हो रहा है, लेकिन चीन को योनी एक्सप में कमी आई है। वहीं, यूरोप और अमेरिका को निर्यात हो रहा है।

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, मेडअप्स और हैंडलूम उत्पादों का निर्यात इस साल अगस्त महीने में 82.86 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले महज 0.42 फीसदी कम है, जबकि मैन- मेड यार्न फैब्रिक्स व मेडअप्स का एक्स अग में पिछले साल से 24.23 प्रतिशत कम हुआ है। हालांकि जूट से बने उत्पाद का निर्यात पिछले साल से 9.18 फीसदी और कालीन का निर्यात 15.53 फीसदी बढ़ा है।

वहीं, टेक्सटाइल व अपेरल का एक्स अग में 252.86 करोड़ डॉलर हुआ है जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 9.45 फीसदी कम है, जबकि अप्रैल से अगस्त के दौरान टेक्सटाइल व अपेरल का एक्स पिछले साल के मुकाबले 39.28 फीसदी कम हुआ है।

पीएमजे / एसजीके



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