यूपी: परंपरा व्यवसाय से जुड़े कुशल लोगों के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना | उप्र: परम्परा पेशे से जुड़े हुनरमंदों के लिए संजीवनी बनी विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना

लखनऊ, 17 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्थानीय अपराधियों और कारीगरों के विकास के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना चालू की। गांव, कस्बे और शहरों में बड़ी संख्या में रहने वाले परंम्परा पेशे से जुड़े हुनरमंदों के लिए यह योजना संजीवनी बन गई है। इससे समाज के सबसे कमजोर लेकिन महत्वपूर्ण तबके मसलन कुम्हर, लोहार, राजमिस्त्री, दर्जी, बढ़ई, नाई, धोबी, भड़भूजा, मोची और सुनार लोगों के हुनर ​​को नई पहचान मिली है।

मालूम हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस तबके के व्यापक हित के मद्देनजर दिसंबर 2018 में इस योजना की शुरुआत की थी। उद्देश्य था प्रशिक्षण, उन्नत तुल्कित और वित्तीय मदद के जरिए इनकी दक्षता, उत्पादन क्षमता और उत्पाद की गुणवत्ता को बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना।

इस क्रम में चयनित लोगों को विशेषज्ञों द्वारा सप्ताह भर का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान प्रतिदिन की दर से 250 रुपए डीबीटी के जरिए उनके खाने में डाल दिया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को उनके पेशे से जुड़ा नि: शुल्क उन्नत किट भी दिया जाता है। अगर वह अपने काम को विस्तार देने के इच्छुक हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा या मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत उदार शतोर्ं पर बैंकों से ऋण दिलाने में भी सरकार मदद करती है।

अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएलएमई) नवनीत सहगल ने बताया कि वर्ष 2018-19 और 2019-20 में इस योजना से लाभान्वित होने वालों की संख्या क्रमशः: 7,474 और 19,938 रही। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक 1,12,889 आवेदन आ चुके हैं। इनमे से लगभग 20 हजार लोगों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। इनमें बड़ी संख्या में वह भी हैं जो लॉकडाउन के नाते दूसरे प्रदेशों से अपने घर लौटे हैं। पहले चरण में 4,500 लोगों ने ऋण के लिए भी आवेदन किया है। राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में पात्रता के अनुसार, सबको ऋण मुहैया कराने का भरोसा भी दिया गया है। जिला स्तर के विभागीय अधिकारी भी जिला स्तरीय बैंकर कमेटी से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

विकेटी-एसकेपी



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