CAG ने खुलासा किया- केरल में 600 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण नियमों के विपरीत (IANS Exclusive) | कैग का खुलासा- केरल में नियमों के विपरीत हुआ 600 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर केरल की सरकार ने मनमाने तरीके से छह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली सड़कों का निर्माण कर डाला। इन सड़कों को बनाने में क्वालिटी से समझौता हुआ। ठेकेदारों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का खेल हुआ। जिसका खुलासा देश की सर्वोच्च लेखा परीक्षा एजेंसी सीएजी (कैग) ने किया है। आईएेंट्स के पास मौजूद ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि केरल सरकार ने सड़कों के निर्माण में सभी नियम-कायदे तोड़ दिए हैं। सीएजी की ओर से दो सितंबर को केरल के इकोनॉमिक सेक्टर को लेकर जारी रिपोर्ट से सड़क निर्माण में गोलमाल की पोल खुली। सीएजी की यह रिपोर्ट केरल की पी विजयन सरकार को मुश्किल में डाल सकती है।

दरअसल, सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय और केरल सरकार के खुद के नियमों के मुताबिक दो करोड़ से ऊपर की लागत वाली सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता की चेक करने के लिए ठेकेदार को विंग लेबोरेटरी (प्रयोगशाला) बनाना जरूरी है। ट्रेंड इंजीनियर की देखरेख में इन अस्पतालों का संचालन होना चाहिए, ताकि सड़कों की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। खुद, केरल सरकार ने 2013 में आर्डर जारी कर दो करोड़ से ऊपर की लागत वाली सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रक के लिए पोस्टल हाउस की योग्यता की आवश्यकता थी। लेकिन, जब केरल सरकार ने राज्य में सड़कों का निर्माण करना शुरू किया तो वह अपने और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेशों को भूल गई।

आईएेंट्स के पास मौजूद 101 पेज की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएजी ने मार्च 2018 तक पीडब्लडी की ओर से कराए गए कुल 282 कार्यो का टेस्ट चेक किया। जिसमें से कुल 92 कार्यो की लागत दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रही है। इस प्रकार सभी 92 कार्यो के लिए ठेकेदारों को फील्ड लेबोरेटरी स्थापित करनी थी। लेकिन जांच में पता चला कि सिर्फ सात कार्यो के लिए ही फिल्पोरेटरी की स्थापना की, जिसकी लागत 101.69 करोड़ रही। जबकि 611.85 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले 85 कार्यो के लिए फील्ड प्रयोगशालाओं की स्थापना ही नहीं हुई। सीएजी को इन प्रयोगशालाओं का कहीं से भी कोई प्रमाण नहीं मिला है। उदाहरण के तौर पर तिरुवनंतपुरम रोडवज की 20, कोज़िकोड की 11 और इडुकी में निर्मित 18 सड़कों की क्वालिटी चेक करने के लिए कोई प्रयोगशाला स्थापित नहीं हुई है।

सीएजी ने रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है, फील्ड लेबोरेटरीज की स्थापना में नाक और जरूरत के हिसाब से क्वालिटी चेक न करना कार्यो की गुणवत्ता से न केवल समझौता दिखाता है बल्कि यह ठेकेदारों का गलत तरीके से पक्ष भी लेता है। सीएजी ने कहा है कि चूंकि यह सिर्फ नमूना जांच थी। इस प्रकार अन्य कार्यो में भी इसी तरह की अनियमितता हो सकती है। इस पीडब्लूडी को अन्य प्रोजेक्ट की भी जांच होनी चाहिए।

केरल में सड़क बनाने में और भी कई तरह की हैरानियां सामने आईं। मसलन, क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट से बचने के लिए कार्यो की लागत को सटकर कई टुकड़ों में दिखाया गया है। यही नहीं सड़क निर्माण के लिए निकाले टेंडर में कई मानकों को हटा दिया गया था, जो कि सड़कों की गुणवत्ता के लिहाज से बहुत जरूरी था।

एनएनएम / एएनएम



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