कोरोना काल में ऑनलाइन स्टडी के लिए देश भर के छात्रों को मुफ्त स्मार्टफोन बांट रही मोदी सरकार? जानिए वायरल हो रहे मैसेज का सच

नई दिल्ली। पूरा देश इस वक़्त कोरोना काल से जूज़ रहा है। चरणबद्ध तरीके से, भले ही देश के राह पर चल रहा हो। लेकिन रोजाना आने वाले कोरोना के नए मामले अब भी इस बात की तसदीक करते है कि कोरोना का एक अभी तक नहीं है। यही कारण है कि तक़रीबन छह स्तन से शैक्षणिक आंदोलनोंी पूरे तरीके से ठप है। इस दौरान अधिकांश स्कूलो और कॉलेजो द्वारा ऑनलाइन पढाई का माध्यम तो चुना गया है। लेकिन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे इससे वंचित है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक मेसेज तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें देश भर के छात्रों को मुफ्त में स्मार्टफोन बांटने का दावा किया जा रहा है।

वायरल हो रहे मेसेज में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार कोरोना संकट के कारण ऑनलाइन एजुकेशन के लिए देश भर के छात्रों को मुफ्त में स्मार्टफोन बांट रही है। इसके साथ ही मेसेज में एक वेबसाइट का नंबर भी दिया जा रहा है। वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि इस सूची पर पंजीकरण कराने के बाद ही स्टूडेंट्स को स्मार्टफोन मिलेगा। व्हाट्सएप्प के साथ ही ऐसा संदेश फेसबुक पर भी वायरल हो रहा है। टाइम्स हिंदी के कई लेखों ने हमें यह संदेश भेजा है कि इसकी विश्वसनीयता का पता लगाने के लिए कहा गया है।

हमने गिरते हुए क्या पाया?

1. सबसे पहले हमने इस खबर के हाईलाइट किए गए कीवर्ड को इन्टरनेट पर तलाशना शुरू किया। तलाशने के क्रम में इस कीवर्ड से हमे केंद्र सरकार की ओर से ऐसी किसी को भी जुलती योजना का कोई समाचार नहीं मिला। जबकि आम तौर पर केंद्र की ओर से जब भी कोई योजना लॉन्च होती है उससे पहले उसको लेकर सैकड़ो ब्लॉग और मीडिया रिपोर्ट्स पोस्ट हो चुके होते हैं।

2. वायरल हो रहे मेसेज को लेकर हमने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के ट्विटर हैंडल का रुख किया। आमतौर पर अपने मंत्रालय से जुड़ी हर छोटी-मोटी जानकारी को केंद्रीय मत्री चिह्नक यहां लोगो के साथ साझा करते हैं। लिहाजा हमने उनके बीते 3 महीने के पूरे ट्वीट को खंगाला। लेकिन हमे ऐसी किसी योजना का जिक्र नहीं मिला।

3. पहले दो मानको पर खरा न उतरने से वायरल हो रहे मेसेज के सत्यता पर हमारी ताकत गहरा गई थी। अब हमने गिरने वाले के कैट पड़ाव में सरकारी एजेंसी राष्ट्रपति इनफॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी की फैक्ट चेक टीम के रेडियो हैंडल का रुख किया। अक्सर पीआईबी की फैक्ट चेक टीम अपने ट्विटर हैंडल पर वायरल हो रही मेसेज के सत्यता के बारे में इन्फो ग्राफिक्स के जरिये लोगो को बताती है। और यहां हमें आखिरकार इस वायरल हो रहे मेसेज से जुड़ा एक सप्ताह पुराना पीआईबी 24 अगस्त को 11:47 बजे एक ट्वीट मिला। पीआईबी ने वायरल हो रहे मेसेज के बारे में कहा था कि यह दावा फर्जी है, केंद्र सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।

पड़ताल से गुजरने के बाद एक दिन हमे इस बात की जानकारी हो गयी थी कि लोगो के बीच वायरल हो रहा है दावा पुर्णतः फर्जी और भ्रामक है। केंद्र सरकार ने ऐसी किसी योजना का एलान नहीं किया है। और केंद्र सरकार कभी किसी योजना का एलान करती है तो कायदे से अख़बार से लेकर टीवी और अलग-अलग वेब पोर्टलों पर इसकी ख़बर है। टाइम्स हिंदी के अनुसार अपील करता है कि किसी भी व्यक्ति पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी देने से पहले उसकी सच्चाई का जरूर पता लगाये। ऐसे नहीं करने पर कई मामलों में डेटा चोरी का खतरा भी बना रहता है।



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