अमेरिका में बैन होने से बचाने टिकटॉक, पैरेंट कंपनी ने भारत को बेची पूर्ण भाग

डेटा सिक्योरिटी को लेकर भारत में पहले से ही बैन हो चुके विवादित ऐप टिकटॉक (टिकटोक प्रतिबंध) अमेरिका में भी बैन होने वाला था। तब टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस ने फैसला लिया कि वह अमेरिकी बैन से बचने के लिए कुछ हिस्सा बेच सकती है, जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राजी नहीं थे और वे आज टिकटक पर प्रतिबंध लगाने वाले थे। लेकिन ऐन वक्त पर टिकटक ने पूरी भागीदारी अमेरिका को दी। प्रारंभ में लेख, टिकटॉक का केवल अमेरिकी व्यापार संभालेगी। हो सकता है कि वह (Microsoft) टिकटॉक के भारतीय बाजार की जिम्मेदारी संभाले। अगर ऐसा होता है तो भारत में टिकटॉक की वापसी तय है।

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माना जा रहा है कि फेसबुक और टिकटॉक का सौदा 5 बिलियन डॉलर में हो सकता है। टिकट ने टिकटॉक को खोला तो अमेरिका में यूजर्स के डेटा की जिम्मेदारी उसकी होगी। यूजर्स का डेटा ब्लॉग के सर्वर पर स्टोर होगा। हालांकि करार को लेकर टिकटॉक या भाषा ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अमेरिका में टिकटॉक के मंथली सक्रिय यूजर्स 80 मिलियन हैं। ऐसे में कंपनी बड़े नुकसानसाना से बच गई है।

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इसके अलावा भारत में टिकटैक की वापसी की उम्मीद भी बढी। भारत में टिकटॉक बैन (टिकटोक प्रतिबंध) की स्थिति तब पैदा हुई थी जब पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना ने अपनी विस्तारवादी नीतियों को बल देते हुए भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की और गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर 15-16 जून की मध्यप्रदेष में हमला किया। बोला। तब देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की लहर के बीच भारत सरकार ने टिकटॉक को भारतीय डेटा को विदेशी सर्वरों पर प्रेषक योग्य पाया। इस क्रम में सरकार ने पहले चरण में 59 अप्लीकेशन बैन (59 ऐप्स प्रतिबंधित) की। जिसमें टिकटॉक भी शामिल था। टिकटॉक का भारत में बैन (टिकटोक प्रतिबंध) होना कंपनी के लिए बड़ा आर्थिक झटका था। इसी तरह से बचने के लिए टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ने अब ट्रम्प प्रशासन के सामने घुटने टेक और भाषा से हाथ मिलाया

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