हिमाचल बनेगा फल राज्य, 100 करोड़ रुपये होंगे खर्च | हिमाचल बेगा फल राज्य, 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे

शिमला, 19 जुलाई (आईएएनएस)। संपूर्णचे प्रदेश कोरीन राज्य बनाने व्रेन के माध्यम से प्रदेश के लोगों की आर्थिकी को सु करनेढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने एशियन विकास बैंक (एडीबी) द्वारा वित्त पोषित एचपी शिवा परियोजना तैयार की है। सरकार के प्रयासों व इस परियोजना को धरातल पर उतारने की बागवानी विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश फल राज्य बनेगा और इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट को पहले निचले हिमाचल के चार जिलों में लागू किया जा रहा है, जिसमें बिलासपुर, मण्डी, कोंगरा और हमीरपुर जिले शामिल हैं।

चयनित जिलों में परियोजना को लागू करने के लिए 17 समूह गठित किए गए हैं, जिनके अंतरर्गत बिलासपुर में चार, मण्डी में छह, कांगड़ा में पांच व हमीरपुर जिला में दो समूह गठित किए गए हैं। एक समूह में 10 हैस्प क्षेत्र को शामिल किया गया है। सिंहित जिलों में परियोजना के तहत लगभग 170 हैस्प क्षेत्र में फलदार पौधे रोपित किए जा रहे हैं।

एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गतगतित क्षेत्रों में लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दो साल चलने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से लगभग 500 परिवारों को उचित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। परियोजना के तहत लगभग 2.50 लाख फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें संतरा, लीची, अमरूद, अनार इत्यादि फलदार पौधे शामिल हैं। लॉकडाउन के दौरान बागवानी विभाग ने फल पौधरोपण स्थलों को तैयार कर लिया है। जुलाई व अगस्त माह में इन विभिन्न कार्यों के फलदार पौधों को प्रस्तावित स्थलों पर रोपित किया जाएगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत उन क्षेत्रों को विकसित करने को प्राथमिकता दी गई है, जहां अभी तक फल उत्पादन नहीं होता है। इसके अतिरिक्त ऐसे स्थानों को भी परियोजना में शामिल किया गया है, जहां जंगली जानवरों से प्रभावित किसानों ने खेती-बाड़ी करना छोड़ दिया है, ताकि इन क्षेत्रों के लोगों को पिछड़े से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके।

आसियान विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित एचपी शिवा परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट के सफल कार्यवेंटयन के बाद परियोजना का मुख्य परियोजना वर्ष 2021-22 में आरम्भ किया जाएगा, जिस पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने वाले प्रस्तावित हैं। परियोजना के प्रथम चरण में प्रदेश के लगभग 25 हजार परिवारों को उचित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

प्रदेश सरकार ने बागवानों के हित में कई कदम उठाए हैं, जिनके अंतरर्गत फल फसलों को ओलों से बचाव के लिए लगभग 12.50 लाख वर्ग मीटर ओला अवरोधक जालियां उपलब्ध करवाई गई हैं। सेब के बागीतन में परागन के लिए 46,265 मधुमक्खी के पकाने के लिए करवाए गए हैं। फलों की फसलों को बीमारियों व कीट-पतंगों से बचाने के लिए 225 मिलियन टन कीटनाशक अनुदान दरों पर फल उत्पादकों को उपलब्ध करवाए गए हैं। बागवानों को पैरों की तुकिंग और अन्य प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। सेब, चेरी व गुठलीदार पैरों की स्कैनिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पैरों की गद्दी के लिए लगभग 3.5 करोड़ बक्सों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा फल विधायन के लिए बागवानों से 8.3 टन टन स्ट्रॉबेरी खरीदी गई है।

हिन्द मन्त्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश को फल राज्य के रूप में विकसित करना है, ताकि प्रदेश के साथ-साथ लोगों की आर्थिकी को भी सु²ढ़ किया जा सके। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रदेश के लगभग 25 प्रतिशत क्षेत्र में ही बागवानी की जाती है। उन्होंने कहा कि परियोजना में ऐसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जहां पर लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है।

– आय



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