भ्रामक विज्ञापन के जुर्म में अब जेल जाएंगे, 20 जुलाई से लागू होगा नया कानून | भ्रामक विज्ञापन देने पर अब जेल जाएगी, 20 जुलाई से लागू होगा नया कानून

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। भ्रामक विज्ञापन देने वाले उपभोक्ताओं को गुमराह करना अब किसी वस्तु के सौमाता व सेवा प्रदाता के लिए स्पष्ट पड़ सकता है, क्योंकि नए उपभोक्ता संरक्षण कानून में इसके लिए 10 लाख रुपये तक जुर्माना और दो साल कारावास की सजा का प्रावधान है। कानून के जानकार बताते हैं कि भ्रामक विज्ञापन करने पर मशहूर हस्तियों को भी नहीं बख्शा करेगा और इसके लिए उनकी भी ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।

नया उपभोक्ता संरक्षण कानून -2019 अगले सप्ताह 20 जुलाई से देशभर में लागू होने जा रहा है, जो उपभोक्ता संरक्षण कानून -1986 की पूरी लेगा। नए उपभोक्ता संरक्षण कानून में विवादों के त्वरित निपटारे के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का प्रावधान है।

लगभग 34 साल बाद नई शक्ल में आने वाले उपभोक्ता संरक्षण कानून -2019 के अध्याय -7 में अपराध और दंड का प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि कोई भी बर्मा या सेवा प्रदाता अगर झूठ या भ्रामक विज्ञापन देता है तो इसके लिए दो साल कारावास की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

सजा का यह प्रावधान पहली बार भ्रामक व झूठा विज्ञापन का दोषी पाया जाने पर है। जबकि अगली बार भी दोषी पाए जाने पर पांच साल तक कारावास की सजा और 50 लाख रुपये तक दबाव का प्रावधान है।

कोलकाता उच्च न्यायालय की अधिवक्ता दिशा शुक्ला ने आईएएनएस से कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 में उपभोक्ता के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है और झूठे व गुमराह करने वाले विज्ञापन देने वालों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि नए कानून के लागू होने पर फिल्म जगत के अभिनेता, अभिनेत्री सहित तमाम मशहूर हस्तियों सहित किसी कंपनी के उत्पाद का विज्ञापन करने के लिए अनुबंध करने से पहले उत्पाद की गुणवत्ता को जरूर दिखाता है क्योंकि भ्रामक विज्ञापन देने पर उनकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

हालांकि केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने पिछले ही साल एक टीवी कार्यक्रम के दौरान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का संदेह दूर करते हुए कहा था कि अगर सेलिब्रिटी विज्ञापन में वही पढ़ते हैं, जो उन्हें लिखकर दिया जाता है तो उन्हें फिर घबराने की जरूरत नहीं है।

अगर कोई नया उपभोक्ता संरक्षण कानून की धारा 20 और 21 के तहत केंद्रीय प्राधिकरण के निर्देशों का अनुपालन नहीं करता है, तो उसे छह महीने की जेल की सजा या 20 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है।

कानून में मिलावटी व खतरनाक वस्तु बनाने और बेचने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। अगर ऐसे उत्पाद से उपभोक्ता को कोई नुकसान नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में छह महीने तक जेल की सजा और एक लाख रुपये तक जुमेर्ना का प्रावधान है।

उपभोक्ताओं को मिलीवटी वस्तु से जब नुकसान होता है, लेकिन गंभीर नुकसान नहीं होता है तो उस स्थिति में एक साल तक जेल की सजा और तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

लेकिन जब ऐसी वस्तु से उपभोक्ता को गंभीर नुकसान होता है तो वैसी स्थिति में सात साल तक जेल की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

नए उपभोक्ता संरक्षण कानून के अनुसार, मिलावटी व खतरनाक वस्तुओं के कारण अगर उपभोक्ता की मौत हो जाती है तो ऐसी वस्तु बनाने वाले या बेचने वाले को कम से कम सात साल की जेल की सजा होगी, लेकिन उसे बढ़ाकर उम्रकैद तक की जा सकती है। साथ ही, भालू भी 10 लाख रुपये से कम नहीं होगा।

– आय



Source link