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यौन संचारित संक्रमण है सिफलिस, पूरे शरीर को कर सकता है प्रभावित

यौन गतिविधियों के दौरान टी. पैलिडम नामक बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जा सकता है, जिसकी वजह से सिफलिस (Syphilis) यानी उपदंश की समस्या हो सकती है. बैक्टीरिया त्वचा में लगी मामूली चोट, खरोंच या श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. इस यौन संचारित संक्रमण (एसटीडी) का इलाज नहीं करवाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. इसमें होने वाला संक्रमण सिर्फ यौन संपर्क के माध्यम से ही फैलता है, ना कि संक्रमित व्यक्ति को छूने से.

सिफलिस के चरण
myUpchar के अनुसार सिफलिस के शुरुआती संक्रमण में जननांग, मलाशय, मुंह या त्वचा की सतह पर दर्दरहित छाला पड़ना शामिल है. बैक्टीरिया से संक्रमित होने के तीन-चार सप्ताह के बाद सिफलिस का प्राथमिक चरण शुरू होता है. इस चरण में पीड़ारहित छोटे छाले पड़ते हैं, जो कि संक्रमण के तीन सप्ताह बाद दिखाई देते हैं, लेकिन इसके दिखाई देने में 10 से 90 दिन भी लग सकते हैं.ये भी पढ़ें – चाहते हैं लंबी उम्र तो खाइए लाल मिर्च, टलेगा कैंसर का भी खतरा: स्टडी

दूसरा चरण यानी माध्यमिक सिफलिस में त्वचा पर चकत्ते और गले में खराश महसूस हो सकती है. ये आमतौर पर हथेलियों और तलवों पर होते हैं और इसमें खुजली नहीं होती है. हालांकि यह चकत्ते हल्के होते हैं जो कि जल्दी ठीक हो सकते हैं.

तीसरा चरण एडवांस है, जिसमें मुख्य अंग प्रभावित हो सकते हैं. इस स्टेज में दिखाई न देना, लकवा और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इस चरण में 15-30 प्रतिशत लोग पहुंचते हैं और ये वे लोग होते हैं जो कि सिफलिस का उपचार नहीं कराते हैं.

ऐसे होता है निदान

सिफलिस का परीक्षण बहुत जरूरी है. डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करने के साथ बीमारी से जुड़ी मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेंगे, ताकि सिफलिस की पुष्टि की जा सके. वे ब्लड टेस्ट के जरिए मौजूदा और पिछले संक्रमण का पता लगा सकते हैं क्योंकि इस टेस्ट में एंटीबॉडी का पता चल जाता हैं. बता दें यह एंटीबॉडी शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए अपने आप विकसित होते हैं.
यदि डॉक्टर को संदेह है कि किसी व्यक्ति को तृतीयक (टर्शीएरी) सिफलिस की वजह से तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं हैं, तो ऐसे में ‘लंबर पंक्चर’ या स्पाइनल टैप की आवश्यकता हो सकती है. इस प्रक्रिया के दौरान स्पाइनल से तरल पदार्थ (स्पाइनल फ्लूड) एकत्र किया जाता है, ताकि डॉक्टर सिफिलिस बैक्टीरिया का परीक्षण कर सकें.

ये हैं मुख्य उपचार
समय पर डॉक्टर के पास जाने से इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक करना संभव है, इसलिए सिफलिस के लक्षणों का इलाज जल्द से जल्द शुरू कर देना चाहिए. किसी भी चरण के लिए मुख्य उपचार पेनिसिलिन है. यह एक एंटीबायोटिक दवा है जो कि बैक्टीरिया को नष्ट कर सकती है. गर्भावस्था में सिफलिस का इलाज होने पर नवजात शिशु को भी एंटीबायोटिक उपचार से गुजरना पड़ सकता है. जब तक संक्रमण ठीक होने का संकेत नहीं मिलता तब तक यौन संपर्क से दूर रहने की सलाह दी जाती है. इस स्थिति में सेक्स पार्टनर का भी परीक्षण किया जाना जरूरी होता है.

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आहार में शामिल करें ये चीजें
प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने करने वाली सभी खाद्य पदार्थों का सेवन जरूरी है. इसमें लहसुन, प्याज, संतरे, नीबू और अन्य खट्टे फल, मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, पालक, गाजर, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, बादाम, अखरोट, कद्दू, अंडे आदि शामिल हैं.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, सिफलिस पढ़ें।

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