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वेजिटेरियन डाइट के बारे में क्‍या हैं मिथक क्‍या है सच, आप भी जानिए

वेजिटेरियन डाइट (Vegetarian Diet) अपनाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसको लेकर भ्रम भी उनके मन में होते हैं. काल्पनिक रूप से वेजिटेरियन डाइट के बारे में कई बातें सामने आती हैं जिनमें आधार नहीं होता और न ही वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित (Certified) होती हैं, लेकिन लोगों के मन की धारणाएं इसको लेकर गलत बन जाती हैं. वेजिटेरियन डाइट को लेकर बने मिथकों के बारे में यहां बताया गया है.

वजन कम करने की गारंटी
अक्सर माना जाता है कि वेजिटेरियन डाइट से वजन कम होता है और इसको ध्यान में रखकर ही वे इस डाइट को अपनाते हैं. आलू के चिप्स से लेकर कुकीज और अन्य कई ऐसी चीजें होती हैं जिनमें फैट होता है. तेल की चीजें भी वजन बढ़ाने में सहायक होती है. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि वेजिटेरियन डाइट से वजन कम होता है.

फलों में चीजी नुकसानदायकनाम से ही पता चलता है कि शाकाहारी भोजन में फल और सब्जियां लेना अहम होता है. फाइबर, विटामिन और खनिजों की आपूर्ति के लिए फल और सब्जियां खानी होती हैं. फलों में होने वाली चीनी को लेकर मिथक है कि यह नुकसानदायक है, लेकिन ऐसा नहीं है. कैंडीज या मीठी चीजों में चीनी मिलाई जाती है, लेकिन फलों में प्राकृतिक रूप से चीनी होती है, जिसमें फाइबर और खनिज होते हैं, ऐसे में यह नुकसानदायक नहीं होती.

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शाकाहार डाइट से मसल्स बनाना मुश्किल
यह भी एक मिथक है कि बिना मांसाहार के मजबूत मांसपेशियों का निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन शाकाहार में भी कई ऐसी चीजें होती है जिनसे मजबूत बॉडी बनाई जा सकती है. विटामिन, खनिज और एंटीऑक्साइड के अलावा प्रोटीन शाकाहार में मौजूद होता है, लेकिन उसके लिए एक योजना बनाकर काम करने की जरूरत है. चरणबद्ध तरीके से इसे अपनाया जाए तो मसल्स मजबूत बनेंगी.

प्रोटीन के रूप में सोयाबीन नुकसानदायक
सोया में नौ एमिनो एसिड होते हैं. इससे जुड़ा भ्रम गलत है कि इसके प्रोटीन से शरीर को नुकसान होगा. पूर्ण प्रोटीन के लिए सोया का उपयोग किया जाना अहम है. सोया पदार्थों के खाने से स्तन कैंसर का जोखिम कम होता है.

बच्चों का शाकाहारी होना सुरक्षित नहीं है
शाकाहारी होने वाले बच्चों के लिए यह नुकसानदायक नहीं है, लेकिन खनिज, विटामिन और प्रोटीन उचित मात्रा में लेने की जरूरत उन्हें होती है. हालांकि उन्हें कितनी मात्रा में विटामिन और प्रोटीन लेना है, इसकी जानकारी जरूरी है. इनकी आवश्यकता को कम करने के लिए एक संतुलित आहार लेना चाहिए. इसलिए यह कह सकते हैं. शाकाहारी होने से बच्चों को कोई नुकसान नहीं होगा.

प्रेगनेंट महिलाओं के लिए वेज डाइट सही नहीं
एक नियोजित शाकाहारी भोजन गर्भवती महिलाओं के पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा कर सकती है. उदाहरण के लिए आयरन की जरूरत गर्भवती महिलाओं को होती है. इसके अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन सी को शामिल करना चाहिए. फलियों और साल्सा से आयरन और विटामिन के बीच संयोजन स्थापित हो सकता है. वेज डाइट से गर्भवती महिलाओं को कोई हानि नहीं होती है.

वेजिटेरियन होने का मतलब स्वस्थ होना
वेज खाने का मतलब स्वस्थ होना कतई नहीं है. आलू, चिप्स और तली हुई चीजें भी वेज में आती हैं, लेकिन ये स्वस्थ शरीर की निशानी नहीं है. फैट, चीनी और सोडियम आदि की मात्रा देखने के बाद ही ऐसी चीजों को अपने आहार में शामिल किया जाना चाहिए. वेज के नाम से कुछ भी खाना स्वास्थ्यवर्धक नहीं है.

वेज डाइट से एनर्जी नहीं होती
जब आपने पोषण लक्ष्य की योजना के साथ शाकाहारी डाइट नहीं अपनाई, तभी आपको यह अच्छा नहीं लगेगा. पर्याप्त मात्रा में खनिज जैसे लोहा, जस्ता या कैल्शियम नहीं मिलेगा, तभी आपको अहसास होगा कि वेज में ऊर्जा नहीं है. ऊर्जा के लिए एक योजना के अनुसार वेज डाइट फॉलो करने पर यह भ्रम भी दूर हो जाता है.

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हमेशा भूखे रहेंगे
बिना मांसाहार के हमेशा भूखे रहने की धारणा गलत है. शाकाहार में मौजूद फाइबर आपके पेट को भरा रखता है इसलिए फाइबर युक्त भोजन करने से बार-बार भूख नहीं लगती. यह खून में चीनी की मात्रा को भी रोकने में सहायक होता है. फाइबर, वसा और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने पर भूख लगती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)



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