सेहत

Lockdown should not be imposed in district, states, crisis can be controlled by February: Govt panel | शहर या राज्‍य में किसी नए Lockdown की जरूरत नहीं: समिति

नई दिल्लीः सरकार द्वारा कोविड-19 पर नियुक्त एक समिति (government-appointed committee) के अनुसार स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए कोई संभावित खतरा नहीं होने तक कोविड-19 को फैलने से रोकने के वास्ते जिला या राज्य स्तर पर कोई नया लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए. आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम विद्यासागर की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी दावा किया कि यदि सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है तो अगले साल की शुरुआत तक इस महामारी को नियंत्रित किया जा सकता है.

कोविड-19 के लिए बनाया गया गणितीय मॉडल
दस सदस्यीय समिति ने ‘‘भारत में कोविड-19 महामारी की प्रगति: रोग निदान और लॉकडाउन प्रभावों’’ पर एक अध्ययन किया. समिति ने कोविड-19 के बढ़ने के लिए एक साक्ष्य आधारित गणितीय मॉडल विकसित किया है. राष्ट्रीय स्तर का ‘सुपर मॉडल’ विभिन्न मापंदडों पर आधारित है जिनमें लॉकडाउन का समय, वैकल्पिक लॉकडाउन परिदृश्य, प्रवासी श्रमिकों के अपने घरों में लौटने का प्रभाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करने के प्रभाव आदि शाामिल हैं. समिति ने कहा, ‘‘यदि हम सभी इन प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, तो महामारी को अगले साल की शुरुआत में फरवरी के अंत तक संक्रमण के मामलों को कम से कम रखकर नियंत्रित किया जा सकता है. हम अभी तक इस महामारी के बारे में यह नहीं जानते कि यह किस विशेष मौसम में कैसा बर्ताव करेगा (सामान्य तौर पर वायरस ठंडे वातावरण में अधिक सक्रिय होते हैं).’’

ये भी पढ़ें- कोरोना संक्रमितों का आकंड़ा 75 लाख के करीब, जानिए क्या कहते हैं हालात

प्रोटोकॉल का करना होगा पालन
विद्यासागर ने कहा, ‘‘इसलिए, मौजूदा व्यक्तिगत सुरक्षा प्रोटोकॉल को जारी रखने की आवश्यकता है, नहीं तो हमें संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है. स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के लिए कोई संभावित खतरा नहीं होने तक कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए जिला या राज्य स्तर पर कोई नया लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए.’’समिति ने कहा कि आगामी त्‍योहार और सर्दी का मौसम संक्रमण की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है लेकिन सभी गतिविधियों को फिर से शुरू किया जा सकता है बशर्ते उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए. 

समिति ने कहा कि जल्द और व्यापक ढंग से लगाये गये लॉकडाउन से मामलों में अधिक वृद्धि होने से रोकने में मदद मिली और व्यवस्था पर भी भार कम किया गया. समिति ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘बिना लॉकडाउन के महामारी भारत को बुरी तरह से प्रभावित करती और जून आने तक मामलों की संख्या 1.40 करोड़ से अधिक हो गई होती. यदि भारत लॉकडाउन लागू करने के लिए मई तक इंतजार करता था, तो जून तक सक्रिय मामलों की संख्या लगभग 50 लाख हो गई होती.’’

लॉकडाउन भारत में रहा कारगर
बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए किए गए विश्लेषणों की अस्थायी रूपरेखा के आधार पर, समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इन राज्यों में संक्रमणों की कुल संख्या पर श्रमिकों के पलायन का प्रभाव कम था. समिति ने यह भी कहा कि मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का पालन करने जैसे विभिन्न सुरक्षा प्रोटोकॉल को लागू करने के साथ एक व्यापक लॉकडाउन लगाने से कई अन्य देशों की तुलना में भारत ने बेहतर ढंग से कोरोना वायरस का सामना किया. समिति ने सिफारिश की है कि मौजूदा व्यक्तिगत सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूर्ण रूप से जारी रखने की आवश्यकता है, नहीं तो देश में संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है.

 



Source link

Leave a Reply