क्या है कोर्टिसोल हॉर्मोन, इस स्ट्रेस हॉर्मोन के कम-ज्यादा होने से हो सकती है ऐसी परेशानी | health – News in Hindi

शरीर में होने वाली क्रियाओं के पीछे किसी न किसी हॉर्मोन (Hormone) का योगदान होता है. जैसे एंडोर्फिन हॉर्मोन के कारण हमें आनंद की अनुभूति होती है, उसी तरह से तनाव के लिए कोर्टिसोल हॉर्मोन को मुख्य कारक माना जाता है. तनाव (Stress) प्रतिक्रिया के संबंध के कारण कोर्टिसोल को ‘स्ट्रेस हार्मोन’ भी कहा जाता है. कोर्टिसोल और शरीर पर होने वाले इसके प्रभावों को समझकर हम हार्मोल संतुलन बनाने के साथ शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं. आइए इस हार्मोन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कोर्टिसोल हार्मोन क्या है?

कोर्टिसोल, स्टेरॉयड हार्मोनों में से एक है. एड्रेनल ग्लैंड द्वारा इस हार्मोन का निर्माण होता है. शरीर की अधिकांश कोशिकाओं में कोर्टिसोल रिसेप्टर्स होते हैं. हार्मोन का स्राव हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी ग्रंथि और एड्रेनल ग्लैंड द्वारा नियंत्रित किया जाता है. चूंकि, कोर्टिसोल शरीर की कई कोशिकाओं में मौजूद होता है, ऐसे में इसके कार्य भी उसी आधार पर अलग-अलग होते हैं.कोर्टिसोल हार्मोन का क्या कार्य होता है?

कोर्टिसोल हार्मोन न सिर्फ तनाव का अनुभव कराता है साथ ही यह कई अन्य प्रकार से भी शरीर के लिए महत्वपूर्ण होता है. ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने के साथ स्मरण शक्ति को मजबूती देने में भी कोर्टिसोल हार्मोन की भूमिका होती है. शरीर में नमक और पानी के संतुलन को बनाए रखने के कारण ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी यह हार्मोन सहायक होता है. कोर्टिसोल हार्मोन महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के समग्र विकास को भी बढ़ावा देता है. स्वास्थ्य की संपूर्ण देखभाल का गुण इस हार्मोन को विशेष बनाती है.

कोर्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाने पर होने वाली समस्याएं

कई लोगों में पिट्यूटरी या एड्रेनल ग्रंथियों में ट्यूमर की शिकायत देखने को मिलती है. इस कारण से कुशिंग सिंड्रोम नामक एक स्थिति उत्पन्न हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक रक्त में कोर्टिसोल के उच्च स्तर की वजह से ही कुशिंग सिंड्रोम की समस्या उत्पन्न होती है. कुशिंग सिंड्रोम वाले व्यक्तियों को चेहरे, पेट और छाती पर तेजी से फैट बढ़ने लगता है. चूंकि कोर की मांसपेशियों की तुलना में व्यक्ति के हाथ और पैर पतले रह जाते हैं, इसी कारण से यह स्पष्ट रूप से नजर आने लगता है. इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम के कारण चेहरे पर लाल धब्बे हो जाना, हाई ब्लड प्रेशर और त्वचा में परिवर्तन जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. कुछ लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस और मूड स्विंग होने की भी शिकायत हो सकती है.

रक्त में कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ने की स्थिति महिलाओं को भी कई प्रकार से प्रभावित कर सकती है. जैसे यह महिलाओं में कामेच्छा और मासिक धर्म चक्र में परिवर्तन का कारण बन सकती है. इतना ही नहीं कोर्टिसोल की मात्रा बढ़ जाने के कारण कुछ महिलाओं को चिंता और अवसाद जैसे विकारों का भी सामना करना पड़ सकता है.

कोर्टिसोल हार्मोन की कमी से होने वाली परेशानियां

कोर्टिसोल हार्मोन की अधिकता और कमी, दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. कोर्टिसोल  की कमी के कारण ‘प्राइमरी एड्रेनल इन्सफीसियंसी’ या एडिसन रोग की समस्या हो सकता है. यह एक दुर्लभ प्रकार की ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसके कारण एड्रेनल ग्रंथियों को क्षति होने का खतरा रहता है. वैसे तो इसके लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं, लेकिन समय के साथ वे काफी गंभीर हो सकते हैं. प्राइमरी एड्रेनल इन्सफीसियंसी के रोगियों को थकान, मांसपेशियों की क्षति, वजन घटाने, मूड स्विंग और त्वचा में परिवर्तन जैसी समस्याओं के होने का खतरा रहता है.

कोर्टिकोस्टेरॉइड थेरपी

यदि आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में कोर्टिसोल का उत्पादन नहीं कर पाता है, तो डॉक्टर कोर्टिकोस्टेरॉइड थेरपी की सलाह दे सकते हैं. कोर्टिकोस्टेरॉइड, कोर्टिसोल का सिंथेटिक रूप होता है, जिसका उपयोग विभिन्न स्थितियों के उपचार के लिए भी किया जा सकता है.

  • इंफ्लामेटरी कंडीशन
  • एडिसन रोग
  • सोरायसिस जैसी त्वचा से संबंधित स्थितियां

चूंकि कोर्टिकोस्टेरॉइड शक्तिशाली दवाइयां होती हैं, ऐसे में इससे कई प्रकार के साइड इफेक्ट होने का भी खतरा रहता है.

  • वजन में वृद्धि, विशेष रूप से चेहरे के आसपास फैट बनना
  • ब्लड शुगर और मधुमेह का बढ़ना
  • तेजी से मूड स्विंग होना, चिड़चिड़ापन और चिंतित महसूस होना
  • संक्रमण का खतरा अधिक होना
  • मोतियाबिंद जैसी आंखों से संबंधित समस्याएं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोर्टिसोल हार्मोन क्या है, इसका महत्व और फायदे पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है.  myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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